Bihar Encounter: बिहार में पुलिसिया कार्रवाई और कथित एनकाउंटर के बढ़ते मामलों ने अब सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने नीतीश सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि सजा देने का अधिकार सिर्फ अदालतों को है, पुलिस को नहीं।
किशनगंज में प्रेस वार्ता के दौरान विधायक अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया कि ‘एनकाउंटर’ के नाम पर संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों विधिवत न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सीधे जान ली जा रही है। ईमान ने सरकार को चेतावनी दी कि लोकतंत्र में ‘ठोक दो’ की संस्कृति देश को विनाश की ओर ले जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है और यहां संविधान ही सर्वोच्च है। पुलिस का काम सिर्फ अपराधी को पकड़कर अदालत के सामने पेश करना है।
बढ़ते Bihar Encounter पर AIMIM का सवाल
अख्तरुल ईमान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि पुलिस खुद ही फैसले सुनाने लगेगी तो अदालतों का महत्व पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधी को फांसी हो या उम्रकैद, यह निर्णय सबूतों के आधार पर न्यायाधीश द्वारा ही होना चाहिए। बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी भी व्यक्ति की जान लेना सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि पुलिस को अपनी सीमा नहीं लांघनी चाहिए।
न्यायिक व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
प्रेस वार्ता में अख्तरुल ईमान काफी आक्रामक दिखे। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि क्या देश का न्यायिक तंत्र अब मृतप्राय हो चुका है? उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों की नीतियों पर सवाल उठाए। ईमान ने कहा कि सजा देने के लिए देश में कानून की किताबें मौजूद हैं। एनकाउंटर समाज में न्याय नहीं, बल्कि दहशत का माहौल पैदा कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने सरकारों के दोहरे मापदंडों पर भी तीखा हमला बोला।
एआईएमआईएम नेता ने आरोप लगाया कि सरकारें खुद अदालती आदेशों की अनदेखी करती हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पर तो अवमानना का केस चल जाता है लेकिन सरकारें मनमानी करती हैं। उनके मुताबिक, अगर अदालती फैसलों को ईमानदारी से जमीन पर लागू किया जाए तो अपराध खुद ही थम जाएंगे। उन्होंने प्रशासन को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की सलाह दी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कानून का राज या डर की राजनीति?
अख्तरुल ईमान के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ सरकार के समर्थक पुलिस की इस कार्रवाई को अपराध खत्म करने का प्रभावी तरीका मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे मानवाधिकारों का घोर हनन बता रहा है। अख्तरुल ईमान ने साफ किया कि वह अपराधियों के पक्ष में नहीं हैं बल्कि वह कानून के राज की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सजा एक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, न कि मनमाने ढंग से। बिहार Encounter के मामलों में पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है।







