
लैंड रेवेन्यू स्कैम: बिहार के किशनगंज से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जमीन-जायदाद के मामलों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठाकुरगंज की तत्कालीन अंचल अधिकारी सुचिता कुमारी पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह घटना बताती है कि किस तरह कुछ अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।
किशनगंज जिले के ठाकुरगंज अंचल में एक बड़े राजस्व घोटाले का खुलासा हुआ है। यहां की तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) सुचिता कुमारी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध दाखिल-खारिज (नामांतरण) करने और एक व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने मामले की जांच के बाद उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके बाद विभागीय कार्रवाई में उनकी दो वेतन वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई।
लैंड रेवेन्यू स्कैम: कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला भातगांव ग्राम पंचायत के नेगराडूबा गांव निवासी मोहम्मद कसमुद्दीन की शिकायत से शुरू हुआ। कसमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि पूर्व अंचल अधिकारी सुचिता कुमारी ने फर्जी दस्तावेज़ (जाली केवाला) का इस्तेमाल करते हुए जमीन का अवैध नामांतरण कर दिया। उन्होंने अपनी आपत्ति और सभी आवश्यक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे, लेकिन सीओ ने उन सभी को नजरअंदाज कर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी थी। इसके बाद जिलाधिकारी किशनगंज को मामले की जांच सौंपी गई। समाहर्ता ने 29 अप्रैल 2025 को विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कसमुद्दीन के आरोप सही पाए गए। इसी रिपोर्ट के आधार पर 19 जून 2025 को राज्यपाल की अनुमति से निलंबन का आदेश जारी किया गया।
दाखिल-खारिज प्रक्रिया और पारदर्शिता
यह गंभीर मामला बिहार में भूमि राजस्व प्रक्रिया में व्याप्त पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। दाखिल-खारिज जैसी महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज़ का इस्तेमाल आज भी एक आम समस्या बनी हुई है। सरकार ने ऐसे मामलों में अब सख्त रुख अपनाया है और सीधे कार्रवाई करके अन्य अधिकारियों को भी यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
शिकायतकर्ता की मांग और आगे की राह
शिकायतकर्ता मोहम्मद कसमुद्दीन ने विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। हालांकि, उनकी मांग है कि लैंड रेवेन्यू स्कैम के तहत हुए सभी फर्जी नामांतरण को तत्काल रद्द किया जाए। इसके साथ ही, इस पूरे मामले के दोषियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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