

आवेश आलम। Madhepura News: समय की रेत पर न्याय की इबारत लिखी गई। दशकों तक चली लड़ाई का आज परिणाम सामने आया है। कानूनी दांव-पेच और प्रतीक्षा की अग्निपरीक्षा से गुजरने के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को राहत मिली है।
मधेपुरा जिले में लगभग 27 साल पुराने जानलेवा हमले के एक मामले में न्यायालय ने सोमवार को अपना अहम फैसला सुनाया। एडीजे-9 रघुवीर प्रसाद की अदालत ने सदर प्रखंड के मधुबन निवासी गणेश मंडल और राजकुमार मंडल को दोषी मानते हुए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर है जो सोचते हैं कि कानून के हाथ उन तक नहीं पहुँच सकते। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह घटना 10 मई 1998 की है, जब भर्राही निवासी जयनारायण साह ने अपनी जमीन पर जबरन कब्जे का विरोध किया था। इस जमीन विवाद के दौरान अभियुक्तों ने जयनारायण साह पर जानलेवा हमला कर दिया था, जिससे वह अधमरा हो गए थे। इसके बाद जयनारायण साह ने भर्राही थाना में तीन नामजद अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
Madhepura News: न्याय की लंबी लड़ाई का सुखद अंत
अदालत ने दोषियों को सजा सुनाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यदि वे जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें 6 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। दोनों दोषियों की उम्र अब लगभग 60 वर्ष हो चुकी है। तीन दशकों के इंतजार के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को न केवल राहत प्रदान की है, बल्कि यह भी साबित किया है कि न्याय भले ही देर से मिले, लेकिन वह अवश्य मिलता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कानून का शिकंजा: दशकों बाद भी मिलती है सज़ा
इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की प्रक्रिया अंततः दोषियों तक पहुँच ही जाती है। यह उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जो लंबी न्यायिक प्रक्रियाओं के कारण उम्मीद छोड़ देते हैं। जयनारायण साह के परिवार को मिली यह राहत एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहाँ न्याय की उम्मीद कभी मरती नहीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





