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Madhubani News: मधुबनी में ज्ञान की गंगा और सुरों की महफिल, Bhamati Vachaspati Mahotsav में दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुति ने जीता दिल

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Bhamati Vachaspati Mahotsav 2026: मधुबनी में ज्ञान की गंगा और सुरों की महफिल, दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुति ने जीता दिल

Bhamati Vachaspati Mahotsav 2026: जैसे वसंत की बयार से प्रकृति झूम उठती है, ठीक वैसे ही मधुबनी की ऐतिहासिक धरती ज्ञान, परंपरा और संगीत के त्रिवेणी संगम में सराबोर हो उठी। अवसर था कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का, जहां विद्वानों के विमर्श से ज्ञान की धारा बही तो कलाकारों के सुरों ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।

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Bhamati Vachaspati Mahotsav 2026: दीप प्रज्वलित कर हुआ भव्य आगाज़

महोत्सव के दूसरे दिन, 15 मार्च 2026 की शाम का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक संध्या रही, जिसका शुभारंभ शाम 6:00 बजे हुआ। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष सुश्री बिंदु गुलाब यादव, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार, अंधराठाढ़ी के प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा भामती वाचस्पति निर्माण समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मिथिला की गौरवशाली परंपरा के अनुसार सभी मंचासीन अतिथियों को पाग, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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उद्घाटन सत्र के दौरान वक्ताओं ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककला और ज्ञान की परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में ऐसे महोत्सवों के महत्व पर जोर दिया। यह एक ऐसा मंच है जो हमारी जड़ों को सींचने का काम करता है।

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मिथिला की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

अपने संबोधन में जिला परिषद अध्यक्ष सुश्री बिंदु गुलाब यादव ने कहा कि मिथिला की भूमि हमेशा से ज्ञान, दर्शन और कला की उर्वर भूमि रही है। पंडित वाचस्पति मिश्र जैसे महान दार्शनिकों ने इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन हमारी युवा पीढ़ी को अपनी महान परंपरा, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

Madhubani News: मधुबनी में ज्ञान की गंगा और सुरों की महफिल, Bhamati Vachaspati Mahotsav में दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुति ने जीता दिल

Madhubani News: दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का हुआ भव्य शुभारंभ

सोमवार शाम 6:00 बजे आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष सुश्री बिंदु गुलाब यादव, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार, अंधराठाढ़ी के प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा भामती वाचस्पति निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री रत्नेश्वर झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के आरंभ में सभी मंचासीन अतिथियों का स्वागत पारंपरिक मैथिली पाग, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष बिंदु गुलाब यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मिथिला की भूमि हमेशा से ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की धरती रही है। उन्होंने पंडित वाचस्पति मिश्र जैसे महान दार्शनिकों को याद करते हुए कहा कि ऐसे मनीषियों ने ही इस क्षेत्र को विश्व पटल पर एक अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने इस आयोजन को नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बताया। वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष श्री संजय यादव ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे मंचों से स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है और हमारी लोक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है।

Madhubani News: मधुबनी में ज्ञान की गंगा और सुरों की महफिल, Bhamati Vachaspati Mahotsav में दिग्गज कलाकारों की प्रस्तुति ने जीता दिल

कलाकारों की प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

उद्घाटन सत्र के बाद सांस्कृतिक संध्या का दौर शुरू हुआ, जिसमें एक से बढ़कर एक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। इस कार्यक्रम ने मिथिला की समृद्ध मैथिली संस्कृति को एक नया मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन उद्घोषक श्री आनन्द मोहन झा ने किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दर्शकों ने सभी प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

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कार्यक्रम में इन कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं:

  • पंचनाद (क्लासिकल फ्यूजन बैंड): राग अहीर भैरव में ‘अलबेला साजन आयो री’ की प्रस्तुति।
  • रंजना झा (प्रसिद्ध मैथिली गायिका): महाकवि विद्यापति रचित ‘चानन भेल’ जैसे गीतों से मन मोहा।
  • अरविंद सिंह (मैथिली भजन गायक): ‘श्याम गजब सहर दरभंगा’ भजन से माहौल को भक्तिमय बनाया।
  • नेहा कुमारी एवं समूह: ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।
  • वर्षा झा (मैथिली गायिका): अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों की वाहवाही लूटी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
  • प्रिया कुमारी एवं समूह: पारंपरिक लोक नृत्य से मंच पर धूम मचा दी।
  • दिव्या एवं शांति (गायिका): ‘छाप तिलक सब छीनी’ गाकर समां बांधा।
  • डेज़ी ठाकुर (गायिका): चैती गीतों की प्रस्तुति दी।
  • तनय झा (गायक): अपनी गायकी से दर्शकों का दिल जीत लिया।
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यह महोत्सव न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने क्षेत्र की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह के आयोजन भविष्य में भी कला और कलाकारों के लिए नए अवसर पैदा करते रहेंगे।

वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय यादव ने जिला प्रशासन और आयोजन समिति को इस सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसी पहलों से न केवल हमारी लोक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी एक प्रतिष्ठित मंच प्राप्त होता है। इस शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया।

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कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से बांधा समां

उद्घाटन और संबोधन के बाद मंच पर सुरों और घुंघरुओं की महफिल सजी, जिसने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। कार्यक्रम की शुरुआत क्लासिकल फ्यूजन बैंड ‘पंचनाद’ की राग अहीर भैरव में ‘अलबेला सजन आयो री’ की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। इसके बाद तो जैसे एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों की झड़ी लग गई।

  • प्रसिद्ध मैथिली गायिका रंजना झा ने महाकवि विद्यापति रचित ‘चानन भेल’ जैसे गीतों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • मैथिली भजन गायक अरविंद सिंह ने ‘श्याम गजब सहर दरभंगा’ गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
  • नेहा कुमारी एवं उनके समूह ने ओडिसी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
  • गायिका वर्षा झा, प्रिया कुमारी एवं समूह (लोक नृत्य), दिव्या एवं शांति (छाप तिलक सब छीनी), डेज़ी ठाकुर (चैती) और तनय झा ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

इस यादगार शाम का बेहतरीन मंच संचालन उद्घोषक आनन्द मोहन झा ने किया। पहले दिन विद्वानों के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा और मैथिली भाषा पर एक गहन परिचर्चा सत्र का भी आयोजन किया गया था, जिसमें क्षेत्र के इतिहास पर प्रकाश डाला गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

यह महोत्सव न केवल एक आयोजन था, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव था, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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