
Census: जाले प्रखंड में जनगणना का काम शुरू हो गया है, लेकिन इसके साथ ही शिक्षकों को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानिए क्या है पूरा मामला और कैसे प्रभावित हो रहा है यह महत्वपूर्ण सरकारी कार्य।
जाले प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में शनिवार से प्रशिक्षित शिक्षकों ने जनगणना कार्य शुरू कर दिया है। इस महत्वपूर्ण कार्य के तहत शिक्षकों को प्रत्येक मकान पर मकान संख्या अंकित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रतनपुर पंचायत में प्राथमिक विद्यालय शेखटोला रतनपुर के शिक्षक इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
इस टीम में रेखा कुमारी, पूजा कुमारी, नारायण यादव, रंजीत महतो, चंदन और गौरव जैसे शिक्षक शामिल हैं। शिक्षकों ने बताया कि 1 मई तक सभी लोगों को अपने मोबाइल के माध्यम से स्व-गणना (self-enumeration) करनी थी, जिसमें उन्हें अपने घर की स्थिति, शौचालय, स्नानघर, जलस्रोत, रसोईघर और वाहन जैसी विस्तृत जानकारी देनी थी। 2 मई से शिक्षकों ने घर-घर जाकर मकान गणना कर उस पर संख्या अंकित करने का काम शुरू किया है।
Census कार्य में क्या हैं चुनौतियाँ?
शिक्षक दल ने बताया कि मकानों पर संख्या अंकित करने के लिए उन्हें कोई आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस वजह से उन्हें Census के काम में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सामग्री की कमी के कारण कार्य की गति धीमी पड़ रही है और गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
बीडीओ का बयान और आगे का निर्देश
इस संबंध में प्रभारी बीडीओ मनोज कुमार ने मीडिया को बताया कि मकानों पर संख्या अंकित करने के लिए आवश्यक सामग्री अभी तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सामग्री उपलब्ध होते ही सभी शिक्षकों को तुरंत प्रदान कर दी जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। बीडीओ ने आगे निर्देश दिया कि जब तक आवश्यक सामग्री प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक सभी शिक्षक गैर-आवासीय घरों की मकान गणना का कार्य जारी रखेंगे।
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