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फ़रवरी, 25, 2026
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मधुबनी के झंझारपुर से आई सशक्त आवाज, साहित्य का मुख्य कार्य कुरीति को समाप्त करना

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मुख्य बातें
झंझारपुर के मेंहथ गांव में जानकी सखी मंडल के तत्त्वावधान में एकल काव्य पाठ कार्यक्रम का हुआ आयोजन
कवि रामसेवक ठाकुर ने एक से बढ़कर एक स्वरचित रचनाओं का किया पाठ
फोटो : दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि

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झंझारपुर, मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। अनुमंडल के मेंहथ गांव में शिक्षाविद काशीनाथ झा किरण के निज आवास पर जानकी सखी मंडल झंझारपुर इकाई की ओर से एकल काव्य पाठ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

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कार्यक्रम का उदघाटन मुख्य अतिथि डॉ. रमेश कुमार झा, प्रो.रामसेवक ठाकुर, डॉ. जयशंकर मिश्र, डॉ. संजीव शमा, डॉ. अनिल ठाकुर, काशीनाथ झा किरण समेत अन्य विद्वतजनों ने विधिवत दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

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साथ ही शुभारंभ विद्यापति रचित गोसाउनि गीत जय जय भैरवि असुर भयाउनि के सामूहिक गान से हुआ। ततपश्चात गायक बोध नारायण सिंह ने अतिथियों के स्वागत में ‘मङ्गलमय दिन आजु हे पाहुन छथि आयल’ स्वागत गान प्रस्तुत किया। मौके पर मुख्य अतिथि डॉ. रमेश कुमार झा ने कहा कि साहित्य का एक मुख्य कार्य कुरीति को समाप्त करना है। उन्होंने प्रो. रामसेवक ठाकुर को श्रीराम का सेवक हनुमान बताया।

प्रो. झा ने कहा कि काव्य करने की जो नीति जानते हैं उन्हें भी अभ्यास की जरूरत होती है। प्रो ठाकुर द्वारा रचित पुस्तक श्री चन्द्र चकोरी जय जय हो को अतुलनीय बताया। प्रो. ठाकुर जिस प्रकार उद्घोषक, रंगकर्मी, अभिनेता, व्यंग कलाकार, हास्य कलाकार के रूप में जाने जाते हैं। उसी प्रकार पुस्तक लिखने में भी वह महारत हासिल किए हुए हैं। उनके द्वारा इससे पहले भी कई रचनाएं लिखी जा चुकी है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. संजीव शमा ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि प्रो. रामसेवक ठाकुर की रचना मैथिली प्रेम, भक्ति भाव, श्रृंगार एवं सामाजिक भाव का दिग्दर्शन है। उनकी लिखी पुस्तक ‘श्री चन्द्र चकोरी जय जय हो’ में बड़े पैमाने पर संकीर्तन व गीत का समावेश किया गया है। डॉ संजीव ने कहा कि संकीर्तन करने वाले लोगों के लिए यह पुस्तक वरदान है।

वहीं, आज के इस युग में धार्मिक व संकीर्तन की यह पुस्तक आने वाले समय में काफी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इनकी एक रचना ‘मानल जे धिया छथि सीता सरूपा, त कोइखेमे माहुर खुआउल किये जाय छै’ सामाजिक जागरूकता को लेकर काफी प्रसिद्ध हुई है। साहित्यकार डॉ. संजीव ने प्रो ठाकुर की श्रृंगार रस को संदर्भित करते हुए ‘छिटकल इजोरिया नहा देलियैया, सरस धार अमरित बहा देलियैया’ का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी रचनाओं में श्रृंगार को उचित स्थान प्राप्त होता देखा जा सकता है। अपने अध्यक्षीय उदबोधन में डॉ. जयशंकर मिश्र ने प्रो. ठाकुर को युगपुरुष की संज्ञा से नवाजा।

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उन्होंने कहा कि प्रो. ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के जीवंत अवतार हैं। वे हर विधा पर समान पकड़ रखने वाले ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्हें साक्षात सरस्वती का वरदान प्राप्त है। प्रो रामसेवक ठाकुर ने एकल काव्य पाठ करते हुए एक से बढ़कर एक रचनाओं का किया पाठ। सीता राम विवाह संकीर्तन के तहत रामसेवक ठाकुर द्वारा रचित ‘श्री चंद्र चकोरी जय जय हो’ पुस्तक के वक्ता के रूप में डॉक्टर संजीव शमा, डॉ अनिल ठाकुर, प्रो प्रीतम कुमार निषाद, सुभाष झा सिनेही ने भी अपने-अपने विचार रखे।

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इस अवसर पर मिथिला के जाने माने गायक बोध नारायण सिंह, काशीनाथ झा किरण एवं छोटकन जी ने अपने गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर डाला। कार्यक्रम में हारमोनियम पर दिवाकर सिंह एवं तबला पर चंद्रशेखर नाथ झा ने कुशल संगति प्रदान की।

मंच संचालन शिक्षाविद डॉ. अनिल ठाकुर एवं धन्यवाद ज्ञापन मंडल के संयोजक अनिल पंकज ने किया। कार्यक्रम में शशि शेखर नाथ झा, श्याम सुंदर झा, अनिल पंकज, मनोज कुमार झा, राजीव कुमार कर्ण, गंगा प्रसाद झा, प्रदीप कुमार झा, राम गुलाम ठाकुर, अमल कुमार झा, विनोद झा, कुलाइ राउत, महाकान्त झा, उमा शंकर पाठक आदि मौजूद थे।

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