

Madhubani News: इंसाफ की चक्की भले ही धीमी चलती है, पर पीसती बहुत बारीक है। मधुबनी की अदालत में जब एक दशक पुराने जघन्य अपराध में फैसला आया तो यह कहावत एक बार फिर सच साबित हो गई।
Madhubani News: जानिए क्या था पूरा मामला
यह मामला खिरहर थाना क्षेत्र का है और साल 2013 से जुड़ा हुआ है। खिरहर थाना कांड संख्या-24/13 के तहत बक्सर जिले के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत चौसा गांव निवासी अशोक कुमार चौबे के बेटे विवेक कुमार चौबे पर एक नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा-363 (अपहरण), 366(a) (नाबालिग को गलत इरादे से ले जाना) और 376 (दुष्कर्म) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत मामला दर्ज किया था।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन अनुसंधान किया और आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत इकट्ठा किए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद कोर्ट में सुनवाई का लंबा दौर चला। अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों और सबूतों से यह साबित कर दिया कि आरोपी विवेक कुमार चौबे ने एक नाबालिग की जिंदगी के साथ घिनौना खिलवाड़ किया था।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
सभी गवाहों के बयान और ठोस सबूतों की जांच के बाद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-VII, मधुबनी की अदालत ने आरोपी विवेक कुमार चौबे को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधु रानी ने जोरदार दलीलें पेश कीं, जिसके परिणामस्वरूप कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
न्यायालय ने विवेक चौबे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसका अर्थ है कि उसे अपनी बाकी की जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजारनी होगी। इसके साथ ही, कोर्ट ने उस पर 50,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले से पीड़ित परिवार को आखिरकार एक दशक बाद न्याय मिला है। यह फैसला समाज में ऐसे अपराध करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तरह के गंभीर अपराधों, खासकर पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में न्यायपालिका का यह सख्त रुख अत्यंत सराहनीय है।


