

Vibrant Village Program: मधुबनी के सीमावर्ती इलाकों की तस्वीर अब बदलने वाली है, जहां विकास की धीमी गति अब रफ़्तार पकड़ने को तैयार है। जिले के 36 गांवों के कायाकल्प की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसकी कमान खुद जिलाधिकारी ने संभाल रखी है।
मधुबनी जिले में जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और विकास की नई लहर लाना था। जिलाधिकारी ने इस योजना के तहत चयनित 7 सीमावर्ती प्रखंडों के 36 गांवों में सभी आवश्यक आधारभूत संरचनाओं की स्थापना और विकास के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
## Vibrant Village Program: इन गांवों का होगा कायाकल्प
बैठक के दौरान जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि चयनित गांवों में विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को इन गांवों में विवाह भवन, लाइब्रेरी, सड़क, सामुदायिक भवन, छठ घाट, खेल का मैदान, स्वास्थ्य उप-केंद्र, और आदर्श विद्यालय जैसी सुविधाओं के निर्माण के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा। इसके अतिरिक्त, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव पर भी तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मधुबनी जिले के जिन गांवों को चुना गया है, उनमें बासोपट्टी प्रखंड के खौना, जोंकी, लौठवा, मझौरा शामिल हैं। इसी तरह हरलाखी प्रखंड से गंगौर, गोपालपुर, हरलाखी, कमतौल, करुणा, मनोहरपुर, नहरनियां, फुलहर, पिपरौन, और उमगांव का चयन हुआ है। जयनगर प्रखंड के बेलही, शिलानाथ दुल्लीपट्टी, उसराही देवधा को भी इस सूची में जगह मिली है। मधवापुर प्रखंड के बसबरिया, दुर्गापट्टी, हनुमान नगर, लोमा, महुआ, परसा, राम नगर कजरा, और सहार गांव भी विकसित किए जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा लदनियां प्रखंड से जोगिया, लौकहा (खुटौना) से अनहरबन, बंदरझूली, पिपराही, लछमीपुर तथा लौकही प्रखंड से नारी, थरवाहि, हरभंगा, महदेवा, अन्धरामठ एवं भरफोरी सहित कुल 36 गांवों को इस प्रोग्राम के तहत नई पहचान मिलेगी।
## क्या है योजना का मुख्य उद्देश्य?
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का लक्ष्य सिर्फ बुनियादी ढांचे का विकास करना ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांव के लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना भी है। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
* **बुनियादी सुविधाओं का विकास:** सभी गांवों तक पक्की सड़क, 24 घंटे बिजली, स्वच्छ पेयजल और बेहतर मोबाइल नेटवर्क की सुविधा पहुंचाना।
* **स्वास्थ्य और शिक्षा:** स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना और बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
* **रोजगार सृजन:** स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना ताकि युवाओं को काम के लिए बाहर न जाना पड़े।
* **पलायन पर रोक:** गांवों को आत्मनिर्भर बनाकर पलायन की समस्या को जड़ से खत्म करना।
इस कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के लिए एक 26 सदस्यीय जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी हैं, जबकि जिला योजना पदाधिकारी को संयोजक बनाया गया है। बैठक में उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह, सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, जिला योजना पदाधिकारी, सीमा सुरक्षा बल के समादेष्टा, डीपीआरओ परिमल कुमार और डीपीओ आईसीडीएस समेत समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कार्यक्रम इन गांवों के लिए एक नई सुबह लेकर आएगा, जिससे यहाँ के निवासियों का भविष्य उज्ज्वल हो सकेगा।






