
पांडुलिपि डिजिटाइजेशन: मधुबनी ने एक बार फिर अपनी पहचान मजबूत की है! बिहार के इस जिले ने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन के मामले में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया है, जो कि इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में यह उपलब्धि सामने आई, जिसने मधुबनी को बिहार के मानचित्र पर एक नए गौरव के साथ स्थापित किया है।
28 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल समीक्षा बैठक में, जिलावार पांडुलिपियों के सत्यापन और सर्वेक्षण की स्थिति का आकलन किया गया। इस दौरान मधुबनी ने 3,96,487 पांडुलिपियों को डिजिटल रूप देने के साथ पूरे बिहार में पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, गया जिला 1,11,398 पांडुलिपियों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। यह सफलता जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का ही परिणाम है।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मधुबनी की बड़ी उपलब्धि: बिहार में नंबर वन
क्या आप जानते हैं कि पांडुलिपियाँ क्या होती हैं? दरअसल, पांडुलिपि ऐसे हस्तलिखित दस्तावेज़ होते हैं जो आमतौर पर 75 साल या उससे अधिक पुराने होते हैं और जिनमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक या ज्ञानवर्धक महत्व छिपा होता है। ये हमारी सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। भारत सरकार द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के तहत देशभर में ऐसी पांडुलिपियों को संरक्षित करने और उन्हें डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने की पहल की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस समृद्ध विरासत से लाभान्वित हो सकें।
क्या है पांडुलिपि डिजिटाइजेशन और इसका महत्व?
इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने जिलेवासियों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि “मधुबनी की यह सफलता हम सभी के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। मैं जिले के सभी नागरिकों, शिक्षकों, संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह करता हूँ कि यदि उनके पास कोई भी पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि उपलब्ध है, तो उसे चिन्हित कर उसके डिजिटाइजेशन में सहयोग करें। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा।” जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि जिला प्रशासन इस दिशा में पूर्ण सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आप भी बन सकते हैं इस अभियान का हिस्सा
यदि आपके पास ऐसी पांडुलिपियाँ हैं जो अभी तक सूचीबद्ध नहीं हैं, या आपको अपने क्षेत्र में किसी पांडुलिपि की जानकारी है, अथवा आप किसी संस्था/परिवार से जुड़े हैं जो पांडुलिपियों का संरक्षण कर रहा है, तो आप ज्ञान भारतम् ऐप डाउनलोड कर इस अभियान से जुड़ सकते हैं और अपनी अमूल्य धरोहर को सुरक्षित करने में योगदान दे सकते हैं। विशेष जानकारी या सहयोग हेतु जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मोबाइल नंबर 9931747796 पर संपर्क किया जा सकता है। मधुबनी का यह प्रथम स्थान न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है, बल्कि यह जिले की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। इस पांडुलिपि डिजिटाइजेशन अभियान में हर नागरिक को जुड़ना चाहिए ताकि हमारी पहचान और इतिहास सदा के लिए संरक्षित रह सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






