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Madhubani का Mithila Haat…हमारी खान-पान, मिला नया बाजार, हर दिन पहुंचते करीब 5 हजार लोग, विदेशी मेहमानों को भी लगा मिथिला के स्वाद का चस्का

मुख्य बातें: देसी विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बना मिथिला हाट: मंत्री संजय कुमार झा, मिथिला की पुरानी पारंपरिक ग्रामीण जीवनशैली से रूबरू हो रहे लोग, बाजार और वोटिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी उठाते लुफ्त

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झंझारपुर, मधुबनी देशज टाइम्स। देश की राजधानी दिल्ली के मशहूर दिल्ली हाट के तर्ज पर जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत अड़रिया संग्राम गांव में ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर 57 के किनारे अवस्थित मिथिला हाट अब न केवल देसी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है, बल्कि मिथिला की कला संस्कृति और खान-पान को भी एक नया बाजार और (Mithila Haat in Madhubani…our food and drink, got a new market) नई पहचान दिला रहा है।

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प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटक न केवल मिथिला की पुरानी पारंपरिक ग्रामीण जीवनशैली से रूबरू हो रहे हैं बल्कि बाजार और वोटिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी लुफ्त उठा रहे हैं।

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नई पीढ़ी को यहां उन चीजों को देखकर अलग ही अनुभूति हो रही है जो कभी उनकी दादी नानी के दैनिक उपयोग में शामिल थी लेकिन अब ज्यादातर घरों से विलुप्त हो चुकी है।एक प्रचलित कहावत है “जहां चाह वहां राह” मिथिला हाट के अपने सपने को सच करके इस कहावत को चरितार्थ किया है सूबे के जल संसाधन एवं सूचना जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा ने।

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उन्होंने साबित कर दिखाया कि सपने हमेशा बड़े देखने चाहिए। दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है। मिथिला की विकास को कई आधुनिक सौगात देने और पूरे मिथिला में विकास पुरुष के नाम से पुकारे जाने वाले संजय कुमार झा जब दिल्ली में आईएन मार्केट की तरफ

से गुजरते थे तो उन्हें दिल्ली हाट को देखकर सुखद अनुभूति होती थी और मन में ख्याल आता था कि काश मिथिला में भी ऐसा एक आधुनिक हाट होता, जहां पहुंचकर लोग मिथिला की कला संस्कृति और खानपान से रूबरू होते जहां मिथिला पेंटिंग और हस्त शिल्प समेत विभिन्न सामानों की बिक्री से क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

मिलती,और जहां मिथिला के लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए आधुनिक मंच मिलता ताकि वे भी देश-विदेश के लोगों तक इसका प्रचार प्रसार कर पाते। साथ ही मिथिला की युवा पीढ़ी को अपनी परंपरा और विरासत की जानकारी मिल पाती,

जिस पर वे गर्व कर पाते। मंत्री श्री झा ने अपने इस सपनों को सच करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू किया। जल संसाधन मंत्री बनने पर उन्होंने जल संसाधन विभाग के जरिए अपने इस सपने को साकार किया। इसके लिए उन्होंने अपने ऐच्छिक कोष से भी 85 हजार रुपये की अनुशंसा की।

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उनके दुरगामी सोच, दृढ़ संकल्प एवं कारगर प्रयासों के कारण निर्मित मिथिला हाट आज देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र बन गया है और निरंतर इसकी लोकप्रियता की नई ऊंचाई छू रही है।

उल्लेखनीय है कि मिथिला की कला संस्कृति हमेशा ही लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है वह चाहे कभी विद्यापति जी की रचना हो, मिथिला पेंटिंग हो या फिर माछ-मखान वाला खानपान, इन सब चीज की चर्चा पूरे देश में होती है इस चर्चा में अब मिथिला है का नाम भी जुड़ गया है।

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मिथिला हाट के भवन की अनूठी स्थापत्य शैली और सुंदर तालाब इसके खास आकर्षण हैं। बिहार सरकार की जल संसाधन विभाग ने मिथिला हाट की संरचनाओं का निर्माण कराने के साथ-साथ इसके बगल में स्थित बड़े तालाब का विकास एवं सौंदरीकरण भी कराया।

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