

George Fernandes: राजनीति के वो फौलादी स्तंभ, जिनकी गूंज आज भी सत्ता के गलियारों में सुनाई देती है। मुजफ्फरपुर की धरती से उनका रिश्ता इतना गहरा था कि आज भी यहां के लोग उन्हें अपने नेता के रूप में याद करते हैं। गुरुवार को उनकी पुण्यतिथि पर शहर ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।
जब George Fernandes के योगदान को किया गया याद
महान समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को मुजफ्फरपुर के सिटी पार्क में स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया और उनके साथ बिताए पलों को याद किया। कार्यक्रम का नेतृत्व जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने किया।
जिलाधिकारी ने जॉर्ज फर्नांडिस की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर हमेशा जॉर्ज साहब की कर्मभूमि रही है और यहां के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में देश को एक नई दिशा देने का काम किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक प्रखर वक्ता और जुझारू नेता होने के बावजूद उनका जीवन बेहद सादगी भरा था। देश के देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पूर्व रक्षा मंत्री के रूप में भी उन्होंने अपनी एक अलग छाप छोड़ी।
सादा जीवन, उच्च विचार के प्रतीक
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने जॉर्ज फर्नांडिस के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे “सादा जीवन, उच्च विचार” के साक्षात प्रतीक थे। उनका जीवन आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने हमेशा आम आदमी की लड़ाई लड़ी और उनके हकों के लिए संघर्ष किया। यह शहर उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी सादगी और विचारों की गहराई ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुजफ्फरपुर जॉर्ज फर्नांडिस की कर्मभूमि रही है। उन्होंने सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांतों का पालन करते हुए देश को नई दिशा दी। उनके आदर्श, मूल्य और संघर्षशील व्यक्तित्व आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। फर्नांडिस ने हमेशा कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों की आवाज बुलंद की।
सिटी पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर उन यादों को ताजा कर दिया, जब जॉर्ज साहब मुजफ्फरपुर की सड़कों पर आम लोगों के बीच घूमते और उनके सुख-दुःख में भागीदार बनते थे। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह श्रद्धांजलि सभा इसी संकल्प का प्रतीक थी।





