
Patna High Court Judge: वकालत के गलियारों में जोरों पर रही चर्चाओं और वर्षों की तपस्या का फल आखिरकार शुक्रवार देर रात मिल गया। विधि के विधान का पालन करने वाले अब विधि के शिखर पर विराजमान होंगे।
पटना हाई कोर्ट जज के तौर पर अंशुल राज का सफर
बिहार की राजधानी पटना के जाने-माने सीनियर अधिवक्ता अंशुल राज को अब उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नई जिम्मेदारी मिली है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी, जिसके बाद न्यायिक गलियारों में खुशी की लहर दौड़ गई। अंशुल राज, पटना के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा के सुपुत्र हैं, जो स्वयं भी उच्च न्यायालय में अपनी वकालत का लोहा मनवा चुके हैं। अंशुल राज का शपथ ग्रहण समारोह जल्द ही आयोजित होने की संभावना है।
अंशुल राज पटना में वकालत के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं। उनकी ख्याति इतनी है कि वे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बिहार में कानूनी सलाहकार भी रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि बिहार के पूरे कानूनी बिरादरी में गर्व का माहौल है। यह एक महत्वपूर्ण न्यायिक नियुक्ति है, जो दर्शाता है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने उनके नाम की अनुशंसा सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम को भेजी थी, जिस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मुहर लगाई। इस नियुक्ति की पुष्टि केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से की। उन्होंने लिखा कि “भारत के संविधान द्वारा दी गई शक्ति का इस्तेमाल करते हुए, राष्ट्रपति ने देश के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद अंशुल राज को पटना हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया है।”
अधिवक्ता अंशुल राज का नाम उच्च न्यायालय का जज बनाने के लिए पटना उच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम को अनुशंसा भेजी थी। यह प्रक्रिया भारतीय न्याय प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, जहां योग्य उम्मीदवारों का चयन कठोर मापदंडों पर किया जाता है। न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अंशुल के पिता, वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा, पटना हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं और बिहार स्टेट बार काउंसिल के सदस्य भी हैं। अपने पुत्र के जज बनने पर योगेश चंद्र वर्मा ने असीम प्रसन्नता व्यक्त की है।
उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति के लिए कम से कम 10 साल तक उच्च न्यायालय या एक से अधिक अदालतों में वकालत का अनुभव होना आवश्यक है। इस लंबी और जटिल प्रक्रिया में, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कॉलेजियम प्रणाली के तहत योग्य व्यक्तियों के नाम सुझाते हैं। यह प्रस्ताव इसके बाद सरकार को भेजा जाता है, जो इसकी समीक्षा करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। समीक्षा के उपरांत, प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम की राय लेकर किसी अधिवक्ता की जज के तौर पर नियुक्ति पर अंतिम निर्णय लेते हैं। आमतौर पर, वरीयता, प्रतिष्ठा और गहन कानूनी समझ रखने वाले वकीलों को ही उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो न्यायपालिका की गरिमा और अखंडता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अंशुल राज की नियुक्ति से उम्मीद है कि वे अपनी विशेषज्ञता और अनुभव से बिहार की न्यायिक प्रणाली को और मजबूत करेंगे।




