
भारत-नेपाल बैठक: हर साल बिहार को अपनी विनाशकारी लहरों से डराने वाली कोसी और गंडक नदियों पर अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है। आगामी मॉनसून से पहले बिहार सरकार ने नेपाल के साथ मिलकर सुरक्षा चक्र तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में 2 मई को नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक हाई-प्रोफाइल संयुक्त बैठक होने वाली है।
यह भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति (JCKGP) की 11वीं महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसमें बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के आला अधिकारी शिरकत करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
फोकस बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था पर
इस बार की बैठक का एजेंडा बेहद खास है, जिसमें अधिकारियों का पूरा फोकस बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था के प्रभावी संचालन पर टिका है। बैठक में कोसी बैराज की सुरक्षा और उसके दोनों तरफ हो रहे तटबंधों के कटाव को रोकने के लिए ठोस रणनीति बनेगी। अक्सर देखा गया है कि नेपाल क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के रखरखाव में कई तकनीकी बाधाएं आती हैं। इस भारत-नेपाल बैठक के जरिए उन प्रशासनिक और वित्तीय पेंचों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
भारत-नेपाल बैठक: प्रमुख एजेंडे और चुनौतियों पर मंथन
इसके अलावा, पश्चिमी मुख्य नहर के गेट संचालन और अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी आमने-सामने बात होगी। गंडक परियोजना को लेकर भी इस बार आर-पार की चर्चा होने की उम्मीद है। जलजमाव के कारण बर्बाद होने वाली कृषि भूमि और नहरों में गाद यानी सिल्ट की समस्या बिहार के किसानों के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। काठमांडू की इस टेबल पर नहरों में पानी के डिस्चार्ज लेवल को बनाए रखने और कटाव निरोधक कार्यों पर नेपाल की सहमति ली जाएगी। साथ ही कोसी टप्पू वन्यजीव क्षेत्र और परियोजना कर्मियों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी इस बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
धरातल पर बदलाव की उम्मीद
यह बैठक सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर बदलाव लाने की एक कोशिश है। बिहार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा इन नदियों के बेहतर प्रबंधन पर टिकी है। नेपाल क्षेत्र में सेवा पथों का निर्माण और वहां लगने वाले स्थानीय करों के विवाद को खत्म करना भी इस द्विपक्षीय वार्ता का हिस्सा है।







