

बिहार वाहन फिटनेस: बिहार की सड़कों पर अब ‘यमराज’ बनकर दौड़ने वाले अनफिट वाहनों की खैर नहीं। परिवहन विभाग ने एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिससे अब इन कबाड़ गाड़ियों का हर रास्ता बंद हो जाएगा।
बिहार वाहन फिटनेस: अब अनफिट गाड़ियों का खेल खत्म! राज्य में बनेंगे 27 नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन
बिहार वाहन फिटनेस: बिहार सरकार ने राज्य की सड़कों पर चल रहे अनफिट वाहनों के परिचालन को पूरी तरह रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने प्रदेश के 27 जिलों में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन स्टेशनों के माध्यम से वाहनों की फिटनेस जांच अब पूरी तरह मशीनों और आधुनिक तकनीक के ज़रिए होगी, जिससे मानवीय हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा। इस पहल से न केवल वाहन जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी, जिससे सड़क सुरक्षा को एक नई दिशा मिलेगी।
इस नए सिस्टम के तहत, वाहनों की फिटनेस जांच के लिए कई कठोर परीक्षण किए जाएंगे। इनमें ब्रेक एफिशिएंसी, स्पीड गवर्नर की कार्यप्रणाली, हेडलाइट अलाइनमेंट, सस्पेंशन सिस्टम और टायर की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच शामिल है। यह सब अत्याधुनिक उपकरणों द्वारा स्वचालित रूप से होगा, जो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या मनमानी की गुंजाइश को खत्म कर देगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे पहले मैनुअल तरीके से होने वाली जांच में कई बार भ्रष्टाचार और धांधली की शिकायतें आती थीं, जिस पर अब लगाम लग सकेगी।
बिहार वाहन फिटनेस: क्या है ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और कैसे बदलेगी जांच प्रक्रिया?
ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) एक ऐसा अत्याधुनिक केंद्र है जहां वाहनों की फिटनेस को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से परखा जाता है। इन स्टेशनों पर वाहन के हर छोटे-बड़े हिस्से की जांच कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों से होती है। उदाहरण के लिए, ब्रेक टेस्टिंग के लिए रोलर ब्रेक टेस्टर, साइड स्लिप के लिए प्लेट टेस्टर और धुआं उत्सर्जन जांच के लिए एमिशन टेस्टर का उपयोग किया जाएगा। इन मशीनों से प्राप्त डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे किसी भी वाहन को गलत तरीके से पास या फेल करना असंभव हो जाएगा। यह कदम वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
राज्य सरकार का यह फैसला बिहार की परिवहन व्यवस्था में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल सड़कों पर सुरक्षित वाहनों का परिचालन सुनिश्चित होगा, बल्कि वाहन मालिकों को भी एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रक्रिया का अनुभव मिलेगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन एटीएस के स्थापित होने से सड़क हादसों में कमी आने के साथ-साथ वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
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फिलहाल, पहले चरण में पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर जैसे बड़े शहरों में इन स्टेशनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसके बाद इन्हें अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य भर में वाहनों की फिटनेस के उच्चतम मानक स्थापित किए जा सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
फिटनेस जांच में पारदर्शिता और मानवीय हस्तक्षेप का अंत
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि फिटनेस जांच में मानवीय हस्तक्षेप बिल्कुल कम हो जाएगा। सेंसर, कैमरे और कंप्यूटर आधारित सिस्टम यह सुनिश्चित करेंगे कि हर वाहन की जांच एक समान और निर्धारित मानकों के अनुसार हो। इससे दलालों की भूमिका समाप्त होगी और आम जनता को बिना किसी परेशानी के अपने वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र मिल सकेगा। यह प्रणाली पूरी तरह से राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी, जिससे बिहार की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार की यह पहल सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन प्रणाली की दिशा में एक बड़ा कदम है।



