
बिहार भूमि सुधार: राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने अपनी जुबान खोली तो पूरे सिस्टम पर कहर टूट पड़ेगा। मंत्री का यह कड़ा रुख जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने और कार्यशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से सामने आया है।
सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना और भू-माफियाओं के तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इसके लिए विभाग में तेजी से तकनीकी बदलाव लाए जा रहे हैं, ताकि भूमि से जुड़ी हर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बन सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
भ्रष्टाचार पर वार और पारदर्शिता का संकल्प
मंत्री डॉ. जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों को सचेत करते हुए स्पष्ट किया कि अब बार-बार निर्देश देने का समय नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि जो कर्मचारी ईमानदारी से जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा और उनके कार्यों को सराहा जाएगा। वहीं, जो लोग फाइलों को बेवजह दबाकर बैठेंगे या बिचौलियों को बढ़ावा देंगे, उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होगी, जो भविष्य के लिए एक नजीर बनेगी। मंत्री ने बताया कि पिछली समीक्षा बैठक में उन्होंने हर बिंदु पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। सरकार का लक्ष्य बिहार भूमि सुधार के माध्यम से आम जनता को राहत पहुंचाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
भू-माफियाओं पर नकेल और डिजिटल सुरक्षा
बिहार में जमीन विवादों के लंबे इतिहास का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि पहले भू-माफिया सरकारी रिकॉर्ड्स के साथ आसानी से छेड़छाड़ करते थे। पुराने समय में ‘रजिस्टर-2’ के पन्ने फाड़ दिए जाते थे, जिससे असली हकदार अपनी जमीन से वंचित रह जाते थे। डॉ. जायसवाल ने जानकारी दी कि अब सरकार ने करोड़ों दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी कर ली है। इस व्यापक कंप्यूटरीकरण के चलते अब कोई भी भू-माफिया पुराने रिकॉर्ड को न तो गायब कर पाएगा और न ही उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ कर पाएगा। डिजिटल सुरक्षा के इस मजबूत घेरे से अब आम आदमी की जमीन पूरी तरह सुरक्षित है।
सर्वे की चुनौतियां और विवादों का समाधान
मंत्री ने अपने संबोधन में लगभग 100 साल बाद हो रहे कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत बिहार के लगभग डेढ़ करोड़ परिवारों की जमीन का सर्वे किया जा रहा है। सरकार ने इस कार्य को गति देने के लिए 11 हजार अमीनों की बहाली भी की है। मंत्री के अनुसार, जब यह प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब कई तरह की भ्रामक खबरें फैलाई गई थीं। सरकार ने उन सभी चुनौतियों का शांतिपूर्वक सामना किया, और आज यह सर्वे जमीन विवादों को स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
डॉ. दिलीप जायसवाल ने आंकड़ों के जरिए बताया कि बिहार में जमीन विवाद को जितना बड़ा बताया जाता है, स्थिति उतनी भयावह नहीं है। उनके विश्लेषण के अनुसार, राज्य की केवल 15 से 16 प्रतिशत जमीन पर ही गंभीर कानूनी विवाद हैं। शेष अधिकतर मामलों को आपसी समझ और विभागीय सक्रियता से आसानी से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन विवादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। मंत्री का यह नया और दृढ़ अवतार बिहार की प्रशासनिक मशीनरी में एक सकारात्मक हड़कंप मचाने के लिए काफी है, जिससे बिहार भूमि सुधार की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।
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