
सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल: अगर आप बिहार में रहते हैं और 14 मई को सायरन या अंधेरा छाने की खबर सुनें तो घबराइएगा मत! दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर राज्य के 6 जिलों में बड़े पैमाने पर नकली हवाई हमले और ब्लैकआउट का अभ्यास होने जा रहा है। यह अभ्यास आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

किन जिलों में होगा सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल?
बिहार सरकार के निर्देशों के अनुसार, यह बड़ा अभ्यास 14 मई को एक साथ छह जिलों में आयोजित किया जाएगा। इन जिलों में राजधानी पटना के साथ-साथ किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार शामिल हैं। इस दौरान हवाई हमले और बिजली गुल (ब्लैकआउट) जैसी आपातकालीन स्थितियों का सिमुलेशन किया जाएगा ताकि नागरिक सुरक्षा प्रणालियों की क्षमता का परीक्षण हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्या है इस अभ्यास का उद्देश्य?
इस मेगा मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन के लिए राज्य की तैयारियों को परखना और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रहे इस अभ्यास की नोडल एजेंसी बिहार नागरिक सुरक्षा निदेशालय (Directorate of Civil Defence Bihar) को बनाया गया है। यह निदेशालय पूरे अभ्यास का समन्वय करेगा और सुनिश्चित करेगा कि सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हो। यह सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल न केवल आपातकालीन सेवाओं की दक्षता बढ़ाएगा बल्कि आम जनता को भी ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए जागरूक करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल से पहले तैयारी
अभ्यास से पहले, अधिकारियों ने बुधवार को एक ‘टेबल-टॉप एक्सरसाइज’ का आयोजन किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में तैयारियों और समन्वय तंत्र की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल और महानिदेशक परेश सक्सेना ने की। इसमें सभी भागीदार जिलों के आपदा प्रबंधन अधिकारी भी शामिल हुए। प्रस्तुति के दौरान, मो. नदिमुल गफ्फार सिद्दीकी ने मॉक ड्रिल के छह परिचालन घटकों की रूपरेखा प्रस्तुत की और बताया कि उन्हें किस क्रम में अंजाम दिया जाएगा।
ब्लैकआउट अभ्यास: जनता से सहयोग की अपील
अधिकारियों ने बताया कि 14 मई को शाम 7 बजे से 7:15 बजे के बीच ब्लैकआउट अभ्यास होगा। प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने जनता से शांत रहने की अपील करते हुए पूर्ण सहयोग का आग्रह किया है। उन्होंने निवासियों से कहा कि वे इस दौरान जेनरेटर का उपयोग करने से बचें, मोबाइल स्क्रीन, टॉर्च या अन्य प्रकाश स्रोतों का इस्तेमाल न करें और निर्धारित अवधि के दौरान पूरी तरह से ब्लैकआउट का पालन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे नियमित मॉक ड्रिल आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं के लिए सार्वजनिक जागरूकता और तैयारियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सायरन, अस्पताल और बिजली समन्वय
प्रधान सचिव ने जिला अधिकारियों को सभी भागीदार जिलों में चेतावनी सायरन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को ऊर्जा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर ब्लैकआउट अभ्यास के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सायरन को सड़क चौराहों पर लगे सार्वजनिक संबोधन प्रणालियों, पुलिस स्टेशन उपकरणों और अग्निशमन वाहनों का उपयोग करके भी बजाया जा सकता है। मल्ल ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि अभ्यास के दौरान अस्पतालों की खिड़कियों को पर्दों या प्राइवेसी स्क्रीन से ढक दिया जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान, परेश सक्सेना ने नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल से संबंधित परिचालन प्रक्रियाओं पर अधिकारियों को जानकारी दी और अभ्यास के पीछे के उद्देश्यों को समझाया। उन्होंने बताया कि पिछले ड्रिल में बेगूसराय ने विशेष रूप से अच्छा प्रदर्शन किया था और अन्य जिलों से इसी तरह की तैयारी पूरी करने का आग्रह किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष उदयकांत मिश्रा, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के अधिकारी, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के प्रतिनिधि, रेलवे सुरक्षा बल के कर्मी, राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय कैडेट कोर के प्रतिनिधि और नेहरू युवा केंद्र संगठन के अधिकारी शामिल थे। सभी भागीदार जिलों के जिला-स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिकारी भी इस अभ्यास में उपस्थित थे। इस बड़े ब्लैकआउट अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को परखना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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