

Bihar CAG Report: कहते हैं आईना वही दिखाता है, जो सामने होता है। बिहार विधानसभा में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब वित्त मंत्री ने सीएजी की ताजा रिपोर्ट पेश की और सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई।
Bihar CAG Report: बिहार विधानसभा में खुला विभागों की ‘खर्च-गाथा’ का राज, सामने आईं चौंकाने वाली हकीकतें
Bihar CAG Report: सरकारी खजाने का हाल और विभागों की जवाबदेही
बिहार विधानसभा में वित्त विभाग के मंत्री विजेंद्र यादव ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी तो सियासी गलियारों में हलचल स्वाभाविक थी। इस रिपोर्ट के सामने आते ही कई सरकारी विभागों की वित्तीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में यह रिपोर्ट सर्वसम्मति से स्वीकार कर ली गई, लेकिन इसके भीतर दर्ज आंकड़े, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई विभागों की खर्च करने की आदतों और कार्यप्रणाली की पोल खोलते प्रतीत हो रहे हैं। यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का पुलिंदा नहीं, बल्कि सरकारी खजाने के सदुपयोग और दुरुपयोग की एक विस्तृत गाथा है, जिसमें वित्तीय अनियमितताएं खुलकर सामने आई हैं।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: अनियमितताओं का लेखा-जोखा
सीएजी की इस गहन पड़ताल में कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जो शासन-प्रशासन के लिए चिंता का सबब बन सकती हैं। रिपोर्ट में विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई देरी, आवंटित बजट का समुचित उपयोग न होना और कुछ मामलों में नियमों का उल्लंघन जैसी गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। इसमें स्पष्ट रूप से उन बिंदुओं को चिह्नित किया गया है जहाँ सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है अथवा जहाँ खर्च की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह महज एक प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं, बल्कि जनता के पैसों का हिसाब-किताब प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। रिपोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित राशि का समय पर और सही तरीके से इस्तेमाल न होना, अंततः आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर सीधा असर डालता है।
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आगे की राह: पारदर्शिता और सुशासन की उम्मीद
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन गंभीर आपत्तियों पर क्या कदम उठाती है। यह रिपोर्ट भविष्य में बेहतर वित्तीय प्रबंधन और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी प्रदान करती है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार इन जानकारियों का उपयोग करके विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार लाएगी और वित्तीय अनियमितताएं रोकने के लिए ठोस उपाय करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समय है जब शासन को अपनी खामियों को स्वीकार कर उन्हें दूर करने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि बिहार में सुशासन की परिकल्पना को साकार किया जा सके।




