Bihar Expressway: बिहार के गया जिले में एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। वाराणसी-रांची-कोलकाता छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसका पैकेज-VII गया जिले में बन रहा है। इस महत्वपूर्ण बिहार एक्सप्रेसवे के 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से पर लगभग 1,248.37 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें अब तक 36 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। यह परियोजना भारतमाला परियोजना के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा क्रियान्वित की जा रही है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगी।
गया में एक्सप्रेसवे का निर्माण: प्रगति और लागत
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का पैकेज-VII गया जिले के अनारबनसलेया गांव से सगरामपुर गांव तक, किलोमीटर 151+200 से किलोमीटर 184+700 के बीच बनाया जा रहा है। इस 33.5 किलोमीटर लंबे खंड का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना की कुल लागत 1,248.37 करोड़ रुपये है, जो क्षेत्र में आधुनिक सड़क अवसंरचना विकसित करने के लिए एक बड़ा निवेश है। निर्माण कार्य में विभिन्न पुलों, फ्लाईओवर, अंडरपास और अन्य संरचनाओं का निर्माण शामिल है, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित होगा।
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवेंद्र कुमार बंसल ने मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे के पैकेज-VII की प्रगति, निर्माण कार्यों, तकनीकी विशेषताओं और परियोजना के क्षेत्रीय महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए मीडिया प्रतिनिधियों के सवालों का भी जवाब दिया।
परियोजना की प्रगति और तकनीकी विशेषताओं से मीडिया को अवगत कराने के उद्देश्य से NHAI, क्षेत्रीय कार्यालय पटना द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को वाराणसी–रांची–कोलकाता एक्सप्रेसवे के पैकेज-VII में एक मीडिया टूर का आयोजन किया गया था। इस दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस अवसर पर NHAI के डिप्टी मैनेजर राजन कुमार शर्मा, क्षेत्रीय कार्यालय, पटना से मैनेजर सुबोध चौधरी एवं डिप्टी मैनेजर कैलाश अग्रवाल तथा परियोजना प्रबंधक प्रणय कुमार भी उपस्थित रहे।
आधुनिक संरचनाएं और वन्यजीव संरक्षण
पैकेज-VII में यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कई आधुनिक संरचनाएं शामिल की गई हैं। इनमें 3 प्रमुख पुल, 9 छोटे पुल, 8 फ्लाईओवर एवं एलिवेटेड संरचनाएं, 19 व्हीकुलर अंडरपास (VUP/SVUP/LVUP), 2 EUP, 2 CUP, 2 एलीफेंट अंडरपास, 2 एनिमल ओवरपास, 107 बॉक्स कल्वर्ट, 1 इंटरचेंज और 1 टोल प्लाजा शामिल हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए 2 रेस्ट एरिया का भी प्रावधान किया गया है। ये संरचनाएं स्थानीय यातायात को बेहतर बनाने और वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही में सहायक होंगी।
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत लगभग 45,000 पौधे लगाने का प्रस्ताव है। बिहार वन विभाग और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के सहयोग से एक व्यापक संरक्षण एवं वन्यजीव शमन योजना तैयार की गई है। NHAI ने इस उद्देश्य के लिए वन विभाग को लगभग 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इस योजना में वन्यजीवों के आवास में सुधार, चयनित अनुसूची-I प्रजातियों के संरक्षण, मृदा एवं जल संरक्षण, वनाग्नि प्रबंधन तथा निगरानी और मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण उपाय शामिल हैं।
क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के विकसित होने से क्षेत्र में सड़क संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे यात्रा समय और वाहन परिचालन लागत में कमी आएगी, जिससे माल एवं यात्री परिवहन अधिक सुगम हो जाएगा। यह परियोजना गया सहित आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, रोजगार के अवसरों और पर्यटन को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी। गया और उसके आसपास बोधगया, देव स्थित सूर्य मंदिर जैसे कई महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं। बेहतर सड़क संपर्क से इन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय व्यापार, परिवहन और समग्र विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। NHAI द्वारा परियोजना का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों और सुरक्षा प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित किया जा रहा है। यह परियोजना बिहार में आधुनिक सड़क अवसंरचना को मजबूत करने और राज्य को देश के प्रमुख आर्थिक एवं परिवहन गलियारों से बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।







