Bihar Fertilizer News: बिहार में इस बार खरीफ फसलों की बुवाई के लिए किसान पूरी तरह से तैयार हैं और कृषि विभाग भी उनकी तैयारियों में जुटा हुआ है। सरकार विशेष रूप से उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और उनके सुचारु वितरण पर पैनी नजर रख रही है। हाल ही में, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि भवन में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में खरीफ सीजन के लिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने और उर्वरकों की कालाबाजारी पर पूर्ण विराम लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
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खरीफ सीजन की तैयारी: खाद की पर्याप्त उपलब्धता और सरकारी निगरानी
बिहार में खरीफ की फसलें राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार हैं, और इनकी सफलता काफी हद तक समय पर तथा पर्याप्त उर्वरकों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, खरीफ खेती के लिए राज्य में लगभग 2.40 लाख टन यूरिया, 1 लाख टन डीएपी, 1.25 लाख टन एनपीके और 0.55 लाख टन एसएसपी की आवश्यकता अनुमानित है। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार खाद मिले।
खुशी की बात यह है कि 3 जून तक राज्य के पास इन अनुमानित आवश्यकताओं से कहीं अधिक उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। विभाग ने बताया कि 3.76 लाख टन यूरिया, 1.54 लाख टन डीएपी, 2.38 लाख टन एनपीके और 1.17 लाख टन एसएसपी जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक बड़ी मात्रा में स्टॉक में हैं। सरकार ने बार-बार यह दोहराया है कि किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और जरूरत पड़ने पर तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसानों तक खाद की पहुंच आसान बनाने के निर्देश दिए हैं।
खाद कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई, हजारों किसानों को राहत
राज्य में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और किसानों से अधिक कीमत वसूलने जैसी गंभीर अनियमितताओं पर कृषि विभाग ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। 3 जून तक पूरे राज्य में हुई गहन जांच के बाद, खाद बिक्री में धांधली पाए जाने पर 29 विक्रेताओं के खिलाफ त्वरित प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कदम उन हजारों किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो अक्सर ऐसी समस्याओं से जूझते रहते हैं।
इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले 208 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस भी तुरंत रद्द कर दिए गए हैं, जो विभाग की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। कृषि मंत्री ने इस संबंध में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि किसानों के अधिकारों से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रखंड स्तर पर उर्वरकों का आवंटन स्थानीय कृषि जरूरतों और खेती के रकबे के आधार पर ही किया जाए, ताकि वास्तविक किसानों तक खाद पहुंच सके।
दुकानों में मौजूद स्टॉक और भौतिक सत्यापन के बीच कोई विसंगति न हो, इसके लिए नियमित जांच का भी आदेश दिया गया है। मंत्री ने चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अनियमितताओं का खुलासा: तीन जिलों में सबसे ज्यादा धांधली
कृषि विभाग द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत राज्य के कई जिलों में उर्वरक दुकानों का सघन निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण के दौरान, विभिन्न स्थानों पर खाद वितरण में अनियमितताएं सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कुछ विक्रेता अभी भी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे। पूर्वी चंपारण जिले में कुल 323 खाद दुकानों की जांच हुई, जिनमें से 18 दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इन मामलों में 8 दुकानदारों पर प्राथमिकी दर्ज की गई और 5 लाइसेंस रद्द कर दिए गए।
इसी क्रम में, पश्चिम चंपारण में 343 दुकानों का निरीक्षण किया गया, जिसमें 25 दुकानों में गड़बड़ी मिली। यहां एक प्राथमिकी दर्ज की गई और 3 लाइसेंस रद्द किए गए। वहीं, सीतामढ़ी जिले में यह आंकड़ा सबसे अधिक चौंकाने वाला रहा, जहां 590 दुकानों का निरीक्षण किया गया और 46 दुकानों में अनियमितताएं उजागर हुईं। सीतामढ़ी में 2 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 7 दुकानों के लाइसेंस रद्द किए गए, जो इस क्षेत्र में धांधली की व्यापकता को दर्शाता है।
कृषि विभाग ने एक बार फिर दोहराया है कि Kharif Crop News के मद्देनजर खरीफ सीजन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह निगरानी अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि किसी भी किसान को असुविधा न हो और वे अपनी फसलों की अच्छी पैदावार सुनिश्चित कर सकें। सरकार की यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







