
Bihar Fuel Consumption: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की भावुक अपील की थी। लेकिन बिहार के नेताओं पर इसका कोई असर नहीं दिखा। पटना में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री तो इलेक्ट्रिक कार से पहुंचे, मगर उनके पीछे मंत्रियों के काफिले में पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों की लंबी कतार ने सबको चौंका दिया। महज 500 मीटर की दूरी के लिए इतनी गाड़ियां क्यों?
मुख्यमंत्री का इलेक्ट्रिक संदेश, मंत्रियों का पेट्रोल-डीजल प्रेम
बुधवार को पटना में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान सचिवालय के बाहर लग्जरी गाड़ियों का अंबार लग गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं पर्यावरण बचाने का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक कार से सचिवालय पहुंचे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। हालांकि, उनके पीछे गाड़ियों का जो काफिला था, उसने सभी को हैरत में डाल दिया। मुख्यमंत्री और उनके 34 मंत्रियों के साथ करीब 120 पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियां सचिवालय परिसर में दाखिल हुईं, जबकि मुख्यमंत्री आवास से सचिवालय की दूरी इतनी कम है कि वहां पैदल भी पहुंचा जा सकता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेशक इलेक्ट्रिक वाहन का चुनाव किया, लेकिन उनके सुरक्षा घेरे और काफिले में 21 गाड़ियां शामिल थीं। इनमें 11 स्कॉर्पियो, 3 इनोवा, 1 फॉर्चूनर और एक जैमर वाली सफारी गाड़ी मौजूद थी। इसके अलावा, काफिले में एम्बुलेंस, दमकल और बोलेरो जैसी भारी गाड़ियां भी थीं। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के नाम पर भारी मात्रा में ईंधन का उपयोग स्पष्ट रूप से देखा गया। यह स्थिति Bihar Fuel Consumption को लेकर प्रधानमंत्री की अपील के विपरीत है।
शेयरिंग से परहेज: VIP कल्चर पर भारी ईंधन की बर्बादी
बैठक में शामिल होने पहुंचे 34 मंत्रियों में से अधिकतर ने कार शेयरिंग की पहल नहीं की। केवल अशोक चौधरी, जमां खान और मदन सहनी ही कार पूल करके कैबिनेट के लिए पहुंचे। नियम के मुताबिक, हर मंत्री के साथ पायलट, एस्कॉर्ट और स्टाफ के वाहन चल रहे थे। औसतन हर मंत्री 3 से 4 गाड़ियों के काफिले के साथ सचिवालय पहुंचा। सचिवालय का परिसर इन महंगी एसयूवी गाड़ियों से पूरी तरह भर गया।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से तेल बचाने की बात कही थी, लेकिन इसके उलट सत्ता के गलियारों में प्रोटोकॉल की चमक ईंधन संरक्षण के विचार पर भारी पड़ती नजर आई। मंत्रियों द्वारा इस तरह की देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ईंधन की बर्बादी चिंताजनक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
संदेश में विरोधाभास: जनता के लिए क्या सबक?
जब सरकार का मुखिया इलेक्ट्रिक वाहन से चलता है तो समाज में एक बड़ा संदेश जाता है। मगर जब उसी वाहन के पीछे डीजल उगलती दर्जनों गाड़ियां चलती हैं, तो वह संदेश धुंधला पड़ जाता है। जानकारों का कहना है कि मंत्रियों के बीच तालमेल की कमी दिखी। अगर मंत्री चाहते तो एक ही वाहन में साथ बैठकर आकर एक मिसाल पेश कर सकते थे। वर्तमान स्थिति में जहां तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहां सरकारी स्तर पर ऐसी फिजूलखर्ची चर्चा का विषय बनी हुई है। यह घटना दर्शाती है कि Bihar Fuel Consumption को लेकर अभी भी जागरूकता की कमी है, खासकर उन लोगों में जिनसे उम्मीद की जाती है कि वे उदाहरण स्थापित करेंगे।






