back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 21, 2026
spot_img

Bihar Ground Water Contamination: बिहार में भूजल संकट गहराया: 30 जिलों में नाइट्रेट, 4 में आर्सेनिक, जानें क्या है खतरनाक स्तर पर – खतरा

spot_img
- Advertisement -

Bihar Groundwater Contamination: धरती के भीतर से निकलता वो अमृत, जो जीवन देता है, अब धीरे-धीरे जहर में बदल रहा है। बिहार के 30 से अधिक जिलों में भूजल की बिगड़ती स्थिति एक गंभीर चेतावनी है।
Bihar Groundwater Contamination: बिहार में भूजल संकट गहराया: 30 जिलों में नाइट्रेट, 4 में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर पर – जानें क्या है खतरा
Bihar Groundwater Contamination: केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की नवीनतम रिपोर्ट ने मुजफ्फरपुर सहित राज्य के 30 जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा को सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाया है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। इसके साथ ही, मधुबनी और शिवहर सहित चार जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी भी पुष्टि हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए एक और बड़ा खतरा है।

- Advertisement -

यह रिपोर्ट बताती है कि भूजल में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ (मेथेमोग्लोबिनेमिया) जैसे जानलेवा रोग का कारण बन सकती है। वहीं, आर्सेनिक युक्त पानी का लंबे समय तक सेवन ‘आर्सेनिकोसिस’ को जन्म देता है, जिससे फेफड़ों संबंधी गंभीर समस्याएं, सांस लेने में तकलीफ और दम घुटने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति प्रदेश के भविष्य पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है।

- Advertisement -

Bihar Groundwater Contamination: किन जिलों में गहराया भूजल संकट?
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सारण, सीवान, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, गया, भोजपुर, बक्सर और औरंगाबाद सहित 30 से अधिक जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की निर्धारित सुरक्षित सीमा को पार कर गई है। कुल 584 नमूनों में से चौंकाने वाले 78 नमूनों (लगभग 13.36 प्रतिशत) में नाइट्रेट का स्तर चिंताजनक रूप से अधिक पाया गया है। यह आंकड़े प्रदेश में भूजल गुणवत्ता की गिरती स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Darbhanga Airport की बदलेगी सूरत, NHAI के नए प्लान से दिल्ली-मुंबई की तरह मिलेगी वर्ल्ड क्लास कनेक्टिविटी!

इस गंभीर मुद्दे पर, मोतीपुर डिवीजन के कार्यपालक अभियंता, अमित स्टीफन ने बताया कि यह रिपोर्ट अभी तक उन तक नहीं पहुंची है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने, नियमित निगरानी रखने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और भूजल संरक्षण के उपायों पर लगातार काम कर रहा है। लेकिन, जमीनी हकीकत इन प्रयासों पर सवाल उठाती है।

ब्लू बेबी सिंड्रोम: क्या हैं लक्षण और खतरा?
एसकेएमसीएच के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जेपी मंडल ने पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिक मात्रा को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक बताया है। उनका कहना है कि छह महीने से कम उम्र के बच्चे इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके होंठ, त्वचा और नाखून नीले पड़ने लगते हैं, जो मेथेमोग्लोबिनेमिया या ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ का स्पष्ट संकेत है। इस स्थिति में, शरीर में नाइट्रेट, नाइट्राइट में बदलकर रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को काफी कम कर देता है आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

डॉ. मंडल के अनुसार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। यह केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण में भी बड़ी बाधा बन सकता है। ऐसे में, सरकार और जनता दोनों को मिलकर भूजल गुणवत्ता को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

IPL 2026: महासंग्राम से पहले टीमों को बड़ा झटका, 15+ धुरंधर हुए बाहर!

IPL 2026: के आगाज से पहले ही क्रिकेट के दीवानों का दिल बैठ गया...

चैत्र नवरात्रि 2026: दुर्गा सप्तशती पाठ से पाएं माँ का आशीर्वाद

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता...

ऐप्पल का मास्टरस्ट्रोक: iPhone 15 सीरीज अब ₹69,900 से, जानिए क्यों अचानक घटी कीमतें

iPhone 15: भारतीय स्मार्टफोन बाजार में प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें