
बिहार के मंत्री: बिहार की राजनीति में एक नए सितारे का उदय हुआ है। दरभंगा जिले के हायाघाट से बीजेपी विधायक डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने सम्राट कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली है। एक साधारण परिवार से आने वाले डॉ. प्रसाद का यह सफर संघर्ष और समर्पण की कहानी कहता है, जिसने मिथिलांचल में नई सियासी चर्चा छेड़ दी है।
कौन हैं बिहार के मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद?
डॉ. रामचंद्र प्रसाद मूल रूप से सिघौली के निवासी हैं। उनका परिवार काफी साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता योगेंद्र प्रसाद किराना दुकान चलाने के साथ खेती-बाड़ी भी करते थे। संघर्षपूर्ण माहौल में पले-बढ़े डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने अपनी मेहनत और संगठनात्मक कार्यों के बल पर राजनीति में अपनी जगह बनाई। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे किसान और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में इलाके में पहचान बना चुके थे। डॉ. प्रसाद बिहार के उच्च शिक्षित विधायकों में शामिल हैं, उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक कार्यों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों से जुड़े रहे, तथा लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहकर पार्टी में अपनी अलग पहचान बनाई।
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पंचायत से विधानसभा और फिर मंत्री पद तक का सफर
डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्थानीय स्तर से की। वर्ष 2011 में वे जिला परिषद सदस्य चुने गए थे। उनकी पत्नी भी दो बार जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं। परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं, जो प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने एक बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि बाद में वे भाजपा संगठन में पूरी मजबूती के साथ सक्रिय हो गए। पार्टी और संघ के साथ लंबे समय तक काम करने का उन्हें राजनीतिक लाभ भी मिला। भाजपा नेतृत्व ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार हायाघाट सीट से एनडीए प्रत्याशी बनाया। उन्होंने राजद के कद्दावर नेता और लालू प्रसाद यादव के करीबी भोला यादव को करीब 10,252 वोटों से हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। उनकी यह लगातार दूसरी जीत थी, जिन्होंने उन्हें बिहार के मंत्री पद तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने माकपा (CPI) के उम्मीदवार श्याम भारती को पराजित कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की। लगातार दो चुनाव जीतने के बाद पार्टी में उनका कद और बढ़ गया, जिससे उन्हें दरभंगा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा बना दिया।
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मिथिलांचल में BJP की नई रणनीति
डॉ. रामचंद्र प्रसाद की छवि एक साफ-सुथरे और ईमानदार नेता की मानी जाती है। उन पर कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। आम लोगों के बीच वे सहज और सरल स्वभाव के नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। हायाघाट और आसपास के क्षेत्रों में वे लगातार जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनके चुनाव प्रचार में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हायाघाट पहुंचे थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डॉ. रामचंद्र प्रसाद को मंत्री बनाकर भाजपा ने संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं और पिछड़ा वर्ग के समाज को बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। मिथिलांचल में भाजपा के विस्तार और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के तहत यह फैसला अहम माना जा रहा है। यह कदम दरभंगा की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।
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