
Bihar News: Bihar Panchayat Elections: सियासत की बिसात पर बिछी है नई चाल, गांवों की सरकार चुनने का बजेगा बिगुल। बिहार पंचायत चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं।
Bihar Panchayat Elections: प्रशासनिक मोर्चे पर तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला स्तर पर पदाधिकारियों की तैनाती का आदेश जारी करते हुए सभी जिलों के जिला दंडाधिकारी (DM) को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) नामित किया है। इसका सीधा अर्थ है कि उन्हें औपचारिक रूप से पंचायत चुनाव की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई है। राज्य में पंचायत आम चुनाव के लिए नवंबर-दिसंबर महीने में मतदान होने की संभावना है।
जिला स्तर पर डीएम के साथ-साथ, संबंधित जिले के जिला पंचायत राज पदाधिकारी को जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) की भूमिका दी गई है। आयोग ने इस संबंध में जारी आदेश की प्रतियां राज्य के मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग के सचिव, सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और सभी जिला दंडाधिकारियों को प्रेषित कर दी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम से मतदान
इस साल होने वाले पंचायत चुनाव कई मायनों में खास होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि मतदाता पहली बार EVM मतदान करेंगे। अब तक गांवों की सरकार चुनने के लिए मतपत्रों का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन इस बार आधुनिक मल्टी पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया जाएगा। इन ईवीएम में छह बैलेट यूनिट होंगी, जिनकी कंट्रोल यूनिट एक ही होगी। मतदाता एक ही जगह पर वार्ड सदस्य, मुखिया, सरपंच जैसे विभिन्न पदों के लिए अपना वोट आसानी से डाल सकेंगे। EVM मतदान से प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।
पंचायत चुनाव में होने वाली धांधली और बोगस वोटिंग पर लगाम कसने के लिए इस बार फेशियल रिकग्निशन तकनीक का सहारा लिया जाएगा। पंचायती राज विभाग से मिली पूर्व जानकारी के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति फर्जी मतदान करने के लिए दूसरी बार बूथ पर आता है, तो वहां लगे कैमरों द्वारा उसकी तुरंत पहचान कर ली जाएगी और उसे दबोच लिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस तकनीकी बदलाव से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
आरक्षण रोस्टर और पदों का निर्धारण
इस साल के पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण रोस्टर में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए सभी जिलों से वार्डवार आंकड़े जुटाने का निर्देश दिया है। इन आंकड़ों के आधार पर नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। नियमों के अनुसार, प्रत्येक दस वर्ष में एक बार आरक्षण रोस्टर में संशोधन अनिवार्य है।
पंचायत आम चुनाव 2026 पुराने परिसीमन के आधार पर ही आयोजित होंगे। राज्य सरकार ने नए सिरे से वार्ड, पंचायत या चुनाव क्षेत्र की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया है। इन चुनावों में कुल ढाई लाख पदों पर मतदान होगा। इनमें ग्राम पंचायत के विभिन्न पद, पंचायत समिति के सदस्य और जिला परिषद के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिससे गांवों के विकास और प्रशासन की बागडोर सौंपी जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





