
पुलिस अनुसंधान का डिजिटलीकरण: बिहार पुलिस अब कागजी कार्रवाई से छुटकारा पाकर डिजिटल युग में कदम रखने जा रही है! आने वाले 5-6 महीनों में राज्य में पुलिस अनुसंधान पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक सब कुछ डिजिटली किया जा सकेगा। यह पहल न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि अपराधियों पर शिकंजा कसने में भी पुलिस को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करेगी।
पटना। बिहार में अगले पांच से छह महीनों के भीतर पुलिस अनुसंधान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने तक, सभी काम अब ऑनलाइन मोड में किए जाएंगे। इसके साथ ही, अपराधियों के फिंगरप्रिंट्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस मुख्यालय में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के एडीजी पारसनाथ ने प्रेस वार्ता के दौरान इस महत्वपूर्ण जानकारी को साझा किया। उन्होंने बताया कि अनुसंधान में डिजिटल ऐप्स का उपयोग बढ़ाने, डेटा को नियमित रूप से अपडेट करने और ऑनलाइन निगरानी की पूरी व्यवस्था की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पुलिस अनुसंधान का डिजिटलीकरण: तकनीक से लैस होगी बिहार पुलिस
एडीजी ने जानकारी दी कि अपराधियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राज्य के 28 जिलों में 50 माप संग्रह इकाइयों (Measurement Collection Units – MCU) की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में अभियुक्तों की तस्वीर, नाम, पता और अन्य संबंधित डेटा का संग्रह किया जाएगा। सी-डैक की सहायता से 12 से 15 मई तक गयाजी, बेगूसराय, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया है। ई-प्रिजन प्रणाली के माध्यम से अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, जेल आवागमन संबंधी जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं का सत्यापन किया जा रहा है। हर महीने औसत दस हजार फिंगरप्रिंट ‘नफिस’ पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। जनवरी से मार्च तक कुल 40,416 फिंगरप्रिंट अपलोड किए जा चुके हैं। इस केंद्रीयकृत पोर्टल का उपयोग पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अपराधियों के फिंगरप्रिंट की खोज और मिलान के लिए कर रही हैं।
सीसीटीएनएस और ई-साक्ष्य: जांच को बनाएंगे पारदर्शी
एडीजी ने आगे बताया कि सभी थाना स्तर पर सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) का समुचित उपयोग अनुसंधानकर्ता द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में 968 थाने इस प्रणाली से जुड़े हुए हैं और जल्द ही बचे हुए सभी थानों को भी इससे जोड़ लिया जाएगा। इस वर्ष जनवरी में सीसीटीएनएस पर दर्ज एफआईआर की संख्या 26,335 थी, जो अप्रैल तक बढ़कर 26,981 हो गई है। इसी तरह, जनवरी में चार्जशीट की संख्या 26,660 से बढ़कर अप्रैल में 37,631 हो गई है। केस डायरी एंट्री के मामलों में अप्रैल में यह संख्या 1,14,552 तक पहुंच गई है। ई-साक्ष्य पोर्टल की मदद से अनुसंधान के दौरान एकत्र किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। यह भारत सरकार द्वारा तैयार किया गया एक विशेष पोर्टल है। जनवरी से अप्रैल तक इस पर 68,844 केसों के दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं, जिनमें से 13,587 को एफआईआर से जोड़ा भी गया है।
गुमशुदा बच्चों की खोज में मिशन वात्सल्य
मिशन वात्सल्य पोर्टल पर गुमशुदा या पीड़ित नाबालिग बच्चों का पूरा विवरण और फोटो अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाता है, ताकि उन्हें खोजने में सुविधा हो। यह पहल बिहार में पुलिस अनुसंधान का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करेगी और अपराध नियंत्रण में आधुनिक तकनीक का पूरा लाभ मिल पाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





