Bihar Politics News: लालू यादव के बड़े साले और पूर्व सांसद साधु यादव ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में बिहार की राजनीति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन, तेजस्वी यादव और लालू यादव सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बेबाक राय रखी, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
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साधु यादव ने अपने इंटरव्यू में कहा कि मोहम्मद शहाबुद्दीन की वजह से यादव समाज और पार्टी की छवि को बहुत नुकसान पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि शहाबुद्दीन के पास उनके सामने खड़े होने की भी हिम्मत नहीं थी। उनका मानना था कि कुछ व्यक्तियों के गलत कृत्यों के कारण पूरे समाज और राजनीतिक संगठन को नकारात्मक रूप से देखा जाने लगा, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण था।
बिहार Politics News: तेजस्वी को दी जनता के बीच जाने की सलाह और ‘गलत लोगों’ से बचने की नसीहत
तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर बात करते हुए साधु यादव ने स्पष्ट कहा कि अगर उन्हें सत्ता में वापसी करनी है तो उन्हें प्रतिदिन हजारों लोगों से मिलना होगा। उन्होंने जोर दिया कि नेताओं को हमेशा जनता के बीच रहना चाहिए और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। जनता से सीधा संवाद स्थापित करना ही राजनीति की सबसे बड़ी ताकत होती है, यह तेजस्वी के लिए अहम संदेश है।
साधु यादव ने तेजस्वी यादव को विशेष सलाह देते हुए कहा कि उन्हें गलत लोगों की संगत से बचना चाहिए और सीधा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं व आम लोगों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने समझाया कि जब कोई नेता जनता के बीच जाता है, तभी उसे वास्तविक मुद्दों और लोगों की गहरी जरूरतों की सही जानकारी मिलती है। उन्होंने पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का भी जिक्र किया, कहा कि पप्पू यादव आज भी उनसे मिलने उनके घर आते हैं और पुराने रिश्तों को कायम रखे हुए हैं।
लालू यादव पर नरम दिखे साधु, बताया नामकरण का दिलचस्प किस्सा
साधु यादव ने अपने छोटे भाई सुभाष यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राजद को मजबूत बनाने में उन्होंने काफी मेहनत की, लेकिन सुभाष यादव की गतिविधियों से उनकी अपनी छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने बताया कि गलत काम कोई और करता था, लेकिन बदनामी उनके हिस्से में आती थी।
अपने नाम से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए साधु यादव ने बताया कि उनके जन्म के समय घर पर साधुओं का लगातार आना-जाना था। उनके जन्म के बाद साधुओं ने उन्हें देखकर कहा था कि यह बच्चा साधु है। तभी से परिवार और गांव के लोग उन्हें ‘साधु’ कहकर बुलाने लगे, जो आज भी उनका पहचान बन गया है।
करीब एक घंटे के पॉडकास्ट में साधु यादव का रुख लालू यादव को लेकर अपेक्षाकृत नरम दिखाई दिया। उन्होंने लालू यादव के संघर्ष और उनके लंबे राजनीतिक सफर का विस्तार से जिक्र किया। साधु यादव ने यह भी याद दिलाया कि इमरजेंसी के दौरान लालू यादव लंबे समय तक उनके ससुराल में ही रहे थे। उन्होंने कहा कि कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर लालू यादव को सामाजिक न्याय का एक बड़ा और महत्वपूर्ण नेता बताया था।
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इस इंटरव्यू से बिहार की राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है, खासकर यादव समाज और युवा नेतृत्व को लेकर।







