गुरु पुष्य योग 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में गुरु पुष्य, रवि पुष्य, द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर जैसे विशेष योगों को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन योगों में किए गए कार्यों का सकारात्मक प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है और सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जून से दिसंबर 2026 के बीच ऐसे कई दुर्लभ और शुभ संयोग बनने जा रहे हैं, जिन्हें निवेश, व्यापार, नौकरी और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
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गुरु पुष्य योग: जानें ज्योतिषीय महत्व और शुभ फल
पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाता है। जब पुष्य नक्षत्र का संयोग गुरुवार के दिन होता है, तब गुरु पुष्य योग बनता है। इसे गुरु पुष्य अमृत योग भी कहा जाता है और वैदिक ज्योतिष में इसे सभी प्रकार के शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसी प्रकार, जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है, तब रवि पुष्य योग बनता है। यह योग धन-संपत्ति में वृद्धि, व्यापार विस्तार, निवेश और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 18 जून को वर्ष 2026 का अंतिम गुरु पुष्य योग बनेगा, जबकि नवंबर महीने में 1 और 29 नवंबर को रवि पुष्य योग का विशेष संयोग रहेगा।
जून से दिसंबर 2026 तक के मुख्य शुभ योग और तिथियाँ
इंदौर के ज्योतिष देवश्री मिश्रा ने बताया, ज्योतिषीय गणना के अनुसार वर्ष 2026 के शेष महीनों में कई महत्वपूर्ण शुभ योग पड़ेंगे। इन तिथियों पर खरीदारी, नए व्यवसाय की शुरुआत और महत्वपूर्ण परियोजनाएं आरंभ करना लाभकारी माना जाता है।
- गुरु पुष्य योग: 18 जून को वर्ष का अंतिम गुरु पुष्य योग बनेगा। इससे पहले 23 अप्रैल और 21 मई को यह शुभ संयोग बन चुका है।
- रवि पुष्य योग: नवंबर महीने में 1 और 29 नवंबर को रवि पुष्य योग का विशेष संयोग रहेगा।
- द्विपुष्कर योग: जून से दिसंबर के बीच चार द्विपुष्कर योग बनेंगे। ये योग 7 जून, 9 अगस्त, 11 अक्टूबर और 5 दिसंबर को आएंगे।
- त्रिपुष्कर योग: इसी अवधि में नौ त्रिपुष्कर योग भी बनेंगे, जिनकी तिथियां 17 जून, 21 जून, 11 जुलाई, 25 अगस्त, 29 अगस्त, 12 सितंबर, 27 अक्टूबर, 31 अक्टूबर और 29 दिसंबर हैं।
शुभ योगों में कार्य करने के क्या हैं विशेष लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन विशेष योगों में शुरू किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक रहती है। विवाह संबंधी चर्चा, संपत्ति खरीद, निवेश, व्यापार विस्तार, वाहन खरीद, गृह प्रवेश और धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्य इन तिथियों में करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन मुहूर्तों में शुरू किए गए कार्य सकारात्मक परिणाम और दीर्घकालिक लाभ प्रदान करते हैं। ज्योतिषाचार्य श्री मिश्रा के अनुसार, इन योगों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और गुरु बृहस्पति की पूजा करने से धन, समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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इन शुभ मुहूर्तों का लाभ उठाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और आने वाले समय को अधिक समृद्ध बना सकते हैं।
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