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बिहार में प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा! शहरी इलाकों में 100% तक बढ़े दाम, जानिए -जमीन-मकान पर अब हर साल कितना % बढ़ेगा सर्किल रेट

Bihar Property: राज्य सरकार ने न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (MVR) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार से नई दरें लागू होंगी, जिससे पटना समेत कई शहरों में जमीन की कीमतें आसमान छूएंगी। संपत्ति खरीदारों पर सीधा असर पड़ेगा, हालांकि महिलाओं को पंजीकरण में विशेष छूट मिलेगी।

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Bihar Property: राज्य सरकार के एक बड़े फैसले के बाद बिहार में संपत्ति खरीदना अब काफी महंगा हो जाएगा। राज्य सरकार ने न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (MVR) यानी सर्किल रेट में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस नए बदलाव के तहत, शहरी क्षेत्रों में भूमि की कीमतें 100 प्रतिशत तक बढ़ाई गई हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट में 1.6 गुना तक की वृद्धि की गई है। ये नई दरें शुक्रवार से पूरे बिहार में प्रभावी हो जाएंगी।

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बिहार में जमीन-मकान खरीदना हुआ महंगा! अब हर साल 5% बढ़ेगा सर्किल रेट, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Bihar Land Registry: बिहार में अब जमीन और मकान खरीदना पहले से अधिक महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने निबंधन दरों में वृद्धि का बड़ा फैसला लिया है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ेगा। यह नया फरमान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

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ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कितनी बढ़ी दरें?

राज्य के ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट यानी न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) में 1.6 गुना की वृद्धि की गई है। वहीं, शहरी क्षेत्रों के लिए सर्किल रेट को दोगुना कर दिया गया है। निबंधन विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इस बढ़ोतरी के साथ ही, अब हर साल एमवीआर में 5 प्रतिशत की स्वचालित वृद्धि होगी। लोगों को आज से ही बढ़ी हुई दरों पर रजिस्ट्री शुल्क का भुगतान करना होगा।

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पहले कब बढ़ी थीं बिहार में जमीन की दरें?

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आखिरी बार 2013 में और शहरी इलाकों में 2016 में सर्किल रेट बढ़ाए गए थे। 2016 में ही सरकार ने शराबबंदी लागू की थी, जिसके बाद यह पहला बड़ा बदलाव है। निबंधन विभाग का मानना है कि बाजार दरें एमवीआर की तुलना में काफी बढ़ गई हैं, इसलिए यह वृद्धि आवश्यक और उचित है।

आम लोगों पर बोझ, भू-माफिया को नहीं फर्क

इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री अब डेढ़ गुना से अधिक महंगी हो गई है। शहरी क्षेत्रों में घर और प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भी बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उन्हें अब पहले के मुकाबले दोगुना खर्च करना होगा। सरकार का अनुमान है कि इस बढ़ोतरी से उसकी आय में इजाफा होगा, लेकिन आम जनता को महंगाई का एक और झटका लग सकता है।

पटना के एक जमीन ब्रोकर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आजकल जमीन वही खरीदता है जिसके पास अकूत धन होता है। ऐसे लोगों को इस बढ़ोतरी से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में भू-माफिया और रियल एस्टेट माफिया का प्रभाव बढ़ गया है, और उन्हें भी इस वृद्धि से कोई असर नहीं होगा।

सरकार के इस कदम से राज्य के राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है, लेकिन इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों पर पड़ेगा। भविष्य में जमीन-मकान की खरीद-बिक्री की गति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

गुरुवार को राज्य के मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने इस निर्णय को अपनी स्वीकृति दी। विभाग के सचिव अजय यादव ने बताया कि शहरी क्षेत्रों के लिए 2016 के बाद और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2013 के बाद यह पहला बड़ा अपडेट है। नई नीति के तहत, अब हर साल सर्किल रेट में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है।

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प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी पर सीधा असर

इस संशोधन का सीधा असर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की लागत पर पड़ेगा। स्टाम्प ड्यूटी को एक प्रतिशत बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, खरीदारों को 2 प्रतिशत पंजीकरण शुल्क भी देना होगा। नगर निगम क्षेत्र में स्थित संपत्तियों पर 2 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगेगा, जिसे सीधे संबंधित शहरी स्थानीय निकायों को हस्तांतरित किया जाएगा।

पटना के प्रमुख इलाकों में जमीन की कीमतें बढ़ीं

संशोधित दरों के बाद पटना के कई पॉश इलाकों, जैसे राजाबाजार, फ्रेजर रोड और बोरिंग रोड में, सरकारी मूल्यांकन के अनुसार एक कट्ठा जमीन की कीमत 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। नई अनुसूची के अनुसार, पटना के 12 प्रमुख व्यावसायिक गलियारों में भूमि का सर्किल रेट प्रति डेसीमल 40 लाख रुपये से दोगुना होकर 80 लाख रुपये हो गया है। चूंकि एक कट्ठा 3.125 डेसीमल के बराबर होता है, इन क्षेत्रों में एक कट्ठा जमीन का आधिकारिक मूल्य 1.25 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.5 करोड़ रुपये हो गया है।

संपत्ति खरीदारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ

सर्किल रेट में इस बढ़ोतरी से पूरे राज्य में भूमि पंजीकरण, स्टाम्प ड्यूटी और संपत्ति लेनदेन की लागत बढ़ने की उम्मीद है। फ्लैट और आवासीय संपत्तियां खरीदने वाले घर खरीदारों को भी अधिक पंजीकरण शुल्क चुकाना होगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित दरों के कारण समग्र आवास लागत में वृद्धि हो सकती है, खासकर शहरी केंद्रों में।

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भूमि अधिग्रहण पर मिलेगा अधिक मुआवजा

राज्य सरकार ने यह भी बताया कि संशोधित दरों से उन भूस्वामियों को लाभ होगा जिनकी संपत्तियां बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाएंगी।

  • राज्य सरकार की योजनाओं के तहत अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में 14,897 करोड़ रुपये से बढ़कर 18,637 करोड़ रुपये तक की वृद्धि का अनुमान है।
  • केंद्र प्रायोजित परियोजनाओं के तहत अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में 24,629 करोड़ रुपये से बढ़कर 39,460 करोड़ रुपये तक की वृद्धि की उम्मीद है।

महिलाओं को मिलेगी पंजीकरण में विशेष छूट

महिलाओं में संपत्ति के स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण रियायत की घोषणा की है। यदि कोई भूमि या संपत्ति किसी महिला के नाम पर पंजीकृत की जाती है, तो उसे संपत्ति पंजीकरण में 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस छूट में स्टाम्प ड्यूटी पर 4 प्रतिशत और पंजीकरण शुल्क में 1 प्रतिशत की कमी शामिल है।

सरलीकृत भूमि वर्गीकरण

सरकार ने भूमि वर्गीकरण मानदंडों को भी सरल बनाया है। संशोधित प्रणाली के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में अब केवल सात भूमि श्रेणियां होंगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में छह श्रेणियां होंगी, जो पहले की अधिक जटिल संरचना की जगह लेंगी। अधिकारियों ने कहा कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य संपत्ति मूल्यांकन में पारदर्शिता में सुधार करना और पूरे बिहार में पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है।

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