
Bihar Revenue Officers Suspension: बिहार की सियासत में इन दिनों नूरा-कुश्ती का मंजर साफ नजर आ रहा है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूर्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के आदेश को पलट दिया है। यह फैसला 47 अंचल और राजस्व अधिकारियों के निलंबन वापसी से जुड़ा है, जिस पर अब सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है।
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Bihar Revenue Officers Suspension: कब और क्यों हुआ था यह विवाद?
दरअसल, बीते मार्च महीने में बिहार के प्रशासनिक हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब अपनी मांगों को लेकर अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था। 9 मार्च को प्रदेश के 47 अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले गए थे, जिससे सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस विरोध से नाराज होकर तत्कालीन राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ा रुख अख्तियार किया था। उन्होंने काम में ‘गतिरोध’ पैदा करने के इल्जाम में इन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
निलंबित हुए सभी अफसरों का मुख्यालय बदलकर पूर्णिया प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय कर दिया गया था। उस वक्त इसे सरकार का ‘कड़ा संदेश’ माना जा रहा था, लेकिन अब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के हस्तक्षेप ने इस पूरी तस्वीर को ही बदल दिया है।
अधिकारियों की बहाली: प्रशासनिक राहत या सियासी चाल?
सियासत में कोई भी फैसला स्थाई नहीं होता। 30 अप्रैल को इन अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए ‘बिना शर्त’ काम पर लौटने की गुहार लगाई। जैसे ही इन अफसरों ने माफीनामा पेश किया, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दरियादिली दिखाते हुए निलंबन वापस लेने का ‘संकल्प’ जारी कर दिया। सम्राट चौधरी के इस फैसले को प्रशासनिक हल्कों में एक तरह के ‘मरहम’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे कई परिवारों को राहत मिली है। इस फैसले से प्रभावित राजस्व अधिकारी अब अपने संबंधित जिलों में वापस लौट सकेंगे।
निलंबन वापसी के बाद ये प्रमुख अधिकारी फिर संभालेंगे अपनी कुर्सी:
- विश्वजीत सिंह (बोचहां, मुजफ्फरपुर)
- निकिता अग्रवाल (श्रीनगर, पूर्णिया)
- रजनीकांत (पटना सदर)
- अमित कुमार (बेलदौर, खगड़िया)
- पुनीत कौशल (खगड़िया सदर)
- राहुल कुमार (बक्सर सदर)
- अर्चना कुमारी (टेटिया बंबर, मुंगेर)
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सियासी गलियारों में चर्चा और भविष्य की राह
हालांकि, सियासी पंडित इस पूरे घटनाक्रम को अलग नजरिए से देख रहे हैं। चर्चा है कि विजय सिन्हा के आदेश को पलटकर सम्राट चौधरी ने अपनी राजनीतिक धमक दिखाई है। जब सूबे में गठबंधन की सरकार हो, तो ऐसे फैसले अक्सर ‘क्रेडिट वॉर’ का सबब बन जाते हैं। विभाग के एक आला अधिकारी का कहना है कि प्रशासनिक अमले में अनुशासन जरूरी है, लेकिन संवाद के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। इस फैसले को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई लोग इसे प्रशासनिक सुधार का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह Bihar Revenue Officers Suspension का मुद्दा आगामी कैबिनेट विस्तार से पहले की सियासी बिसात का हिस्सा है।
फिलहाल, सभी अधिकारियों को अपने संबंधित जिलों के समाहर्ता के पास योगदान देने का निर्देश दे दिया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि विजय सिन्हा इस ‘नए समीकरण’ पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और बिहार की सियात में इसका क्या असर होता है।
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