Bihar Shops Act: बिहार सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत अब दस से कम कर्मचारियों वाले किसी भी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे लाखों छोटे कारोबारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।
राज्य सरकार ने ‘शॉप एक्ट (बिहार दुकान और प्रतिष्ठान-रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) अधिनियम 2025’ को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन की सहमति के बाद इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस ऐतिहासिक फैसले से बिहार के कारोबारी समुदाय में खुशी की लहर है।
नए नियमों के अनुसार, अब केवल उन दुकान-प्रतिष्ठानों को पंजीकरण कराना होगा जहाँ दस या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यह बदलाव केंद्रीय लेबर कोड के अनुरूप है, जो पूरे देश में व्यावसायिक नियमों में एकरूपता लाने का प्रयास करता है। यह नियम सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा जहाँ कर्मचारियों की संख्या दस या उससे अधिक है।
जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने इस अध्यादेश को बीते 28 मई को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके तुरंत बाद ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई। यह कदम राज्य में निवेश और व्यापार के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे नए व्यवसायों को स्थापित करना और चलाना अधिक सुगम हो जाएगा।
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पुराने शॉप एक्ट से मिलती थी कारोबारियों को परेशानी
पहले के शॉप एक्ट के अनुसार, दुकानदारों को एक या दो कर्मचारी रखने पर भी अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना पड़ता था, जो एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया थी। इसके अतिरिक्त, कई बार एक ही व्यवसाय के लिए अलग-अलग विभागों में कई पंजीकरण प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ता था, जिससे छोटे व्यापारियों पर अनुपालन का अतिरिक्त बोझ पड़ता था और उनका काफी समय भी बर्बाद होता था।
केंद्र सरकार द्वारा देशव्यापी ‘उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020’ नामक नए लेबर कोड लागू किए जाने के आलोक में बिहार सरकार ने इस पुराने शॉप एक्ट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि यह बदलाव औद्योगिक क्रियाकलापों और आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाएगा, जिससे प्रदेश में रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार का तर्क है कि प्रदेश में नए औद्योगिक निवेश के अवसरों को बढ़ाने और व्यावसायिक सुगमता लाने के लिए ऐसे पुराने और दोहरे प्रावधानों वाले अधिनियमों को समाप्त करना आवश्यक था। चूंकि इस समय बिहार में विधानमंडल सत्र आहूत नहीं था, इसलिए राज्यपाल ने अध्यादेश के माध्यम से इस महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी प्रदान की है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उद्योगों, निवेशकों, स्टार्टअप और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने संबंधित विभागों को इस दिशा में ठोस प्रस्ताव तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि व्यापारिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि लाइसेंस जारी करने, अनुमति प्रदान करने और निरीक्षण जैसी सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह से सरल और सुगम बनाया जाए। उनका लक्ष्य निवेश और व्यापार में आने वाली सभी जटिलताओं को खत्म करना है, ताकि बिहार में व्यापार करना आसान हो और प्रदेश का तेजी से आर्थिक विकास हो सके।

सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि सरकार की भूमिका नागरिकों और उद्यमियों के लिए सुविधा प्रदाता की होनी चाहिए, न कि अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करने वाली। उन्होंने अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त कर राज्य में एक अनुकूल कारोबारी माहौल बनाने पर विशेष जोर दिया। इससे देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बिहार में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और नए उद्यमी आकर्षित होंगे।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में ‘अनुपालन में कमी और विनियमन में ढील (कंप्लायंस रिडक्शन एंड डिरेगुलेशन)’ से संबंधित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने राज्य में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिसका उद्देश्य नौकरशाही को कम करना और प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना था।
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उन्होंने सभी विभागों को डिजिटल माध्यमों, स्व-प्रमाणीकरण, ऑनलाइन अनुमोदन और समयबद्ध सेवा वितरण की व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्देश दिया। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एक ही जानकारी को विभिन्न सरकारी स्तरों पर बार-बार मांगने की प्रथा को तत्काल समाप्त किया जाए, जिससे व्यापारियों का समय और संसाधन बच सकें।
यह पहल बिहार में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे प्रदेश में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। सरकार का यह कदम राज्य को एक प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।








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