Bihar Stone Mining News: बिहार सरकार मानसून के बाद राज्य के सात जिलों में पत्थरों के खनन को फिर से शुरू करने की तैयारी में है। खनन विभाग ने इसके लिए सभी जरूरी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दे दिया है। जल्द ही ई-नीलामी के जरिए खनन पट्टों का आवंटन किया जाएगा, जिससे निर्माण उद्योग और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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खनन एवं भूतत्व विभाग ने खनन पट्टों के आवंटन के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रियागत आवश्यकताओं को पूरा कर लिया है। शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर और बांका जिलों के लिए जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार कर ली गई हैं, जबकि नवादा के लिए डीएसआर को पहले ही विभागीय मंजूरी मिल चुकी है। उम्मीद है कि सरकार आने वाले महीनों में इन जिलों में खनन पट्टों के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू करेगी।
किन जिलों में फिर शुरू होगा पत्थर खनन?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सात जिलों में कुल 31 पत्थर खदानों में खनन कार्य प्रस्तावित है। विभाग को उम्मीद है कि ई-नीलामी प्रक्रिया से खनन पट्टों के आवंटन में पारदर्शिता आएगी, साथ ही राज्य के लिए राजस्व भी उत्पन्न होगा। अधिकारियों का कहना है कि पत्थर की बढ़ती स्थानीय उपलब्धता बिहार के भीतर बुनियादी ढांचा और निर्माण परियोजनाओं में सहायक हो सकती है। वर्तमान में, राज्य में सीमित पत्थर उत्पादन के कारण निर्माण गतिविधियों के लिए पड़ोसी राज्यों से आपूर्ति पर निर्भरता है।
जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में पर्यावरणीय मापदंडों, भूगर्भीय स्थितियों, खनिज भंडार और आसपास के क्षेत्रों पर खनन के संभावित प्रभाव का आकलन शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि सभी वैधानिक और नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही खनन पट्टों की नीलामी की जाएगी। मानसून के मौसम की समाप्ति के बाद खनन गतिविधियां चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की उम्मीद है।
रोजगार और निर्माण कार्यों पर क्या होगा असर?
उद्योग पर्यवेक्षकों का कहना है कि खनन फिर से शुरू होने से खदान संचालन, परिवहन, पत्थर क्रशिंग इकाइयों और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। खनन गतिविधियों के लंबे समय से बाधित रहने से राज्य के कुछ हिस्सों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ा हुआ स्थानीय उत्पादन उपलब्धता और कीमतों को स्थिर करने में मदद कर सकता है।
विभाग ने संकेत दिया है कि पट्टा आवंटन प्रक्रिया ऑनलाइन ई-नीलामी प्रणाली के माध्यम से आयोजित की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता में सुधार करना और अधिक निगरानी एवं अवलोकन के माध्यम से अनियमितताओं और अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद करना है।
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