Bihar Tap Water News: बिहार में लगभग 15 लाख परिवार अभी भी नल के पानी के कनेक्शन से वंचित हैं। इनमें से अधिकांश महादलित समुदाय से आते हैं, जिसकी जानकारी देते राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) ने दी। विभाग ने इन वंचित परिवारों को अगले तीन महीने के भीतर पाइप से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।
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नल जल योजना: 93% घरों तक पहुंचा पानी, फिर भी लाखों वंचित
PHED मंत्री संजय कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार का लक्ष्य अगले तीन महीनों के भीतर सभी शेष महादलित बस्तियों तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाना है। विभाग के अनुसार, बिहार में नल के पानी की आपूर्ति कवरेज पिछले एक दशक में काफी बढ़ गई है। 2016 में, केवल 2.66 लाख परिवारों के पास यह सुविधा थी, जबकि 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1.87 करोड़ परिवारों तक पहुंच गई है, जो राज्य के लगभग 93% परिवारों को कवर करती है। विभाग ने कहा कि उसका समग्र लक्ष्य लगभग 2.02 करोड़ परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
गर्मी की तैयारी और हैंडपंप का हाल: क्या हैं सरकार के इंतजाम?
PHED के प्रधान सचिव राजेश कुमार ने बताया कि राज्य भर में 86,000 से अधिक हैंडपंप वर्तमान में खराब पड़े हैं, जिनमें से कई मरम्मत से परे हैं। उन्होंने कहा कि जिन पंपों को अभी भी बहाल किया जा सकता है, उनकी मरम्मत का काम चल रहा है। दक्षिण बिहार में, आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए धन का उपयोग करके लगभग 1,000 नए हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य हर साल औसतन 5,000 हैंडपंप स्थापित करता है।
गर्मी के दौरान पानी की कमी को दूर करने के लिए विभाग ने 475 पानी के टैंकर, 15 वाटर एटीएम और 15 जलदूत इकाइयां लगाई हैं। विभाग ने पानी की टंकियों से संबंधित भूमि पंजीकरण मुद्दों के कारण रखरखाव कर्मचारियों के मानदेय के भुगतान में देरी को भी स्वीकार किया। अधिकारियों ने कहा कि इस मामले पर 3 जून को विकास आयुक्त के साथ बैठक में चर्चा की जाएगी।
मुख्य अभियंता नित्यानंद प्रसाद ने बताया कि परियोजना के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग के अनुसार, अब तक 468 ठेकेदारों को डिबार किया गया है और 25 को ब्लैकलिस्ट किया गया है।
गंगा, सोन नदी के पानी से दूर होगी Arsenic की समस्या
राज्य सरकार ने बताया कि गंगा, सोन और सुरसर नदियों के पानी का उपयोग करके बड़े पैमाने पर ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाएं पहले से ही भागलपुर, वैशाली, बक्सर, बेगूसराय, भोजपुर, नवादा और नालंदा सहित जिलों में चल रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कई क्षेत्रों में आर्सेनिक, फ्लोराइड और लोहे से होने वाले भूजल संदूषण को दूर करना है। अधिकारियों ने कहा कि 14 बहु-ग्राम जल आपूर्ति योजनाएं चालू हो गई हैं, जबकि दो परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। दो अतिरिक्त योजनाओं के लिए सर्वेक्षण भी पूरे हो चुके हैं।
विभाग ने कहा कि सुपौल, कैमूर, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर सहित जिलों में नई बहु-ग्राम जल आपूर्ति परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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