
Bihar Technical Education: बिहार ने दिखा दिया है कि जब इरादे नेक और नीतियां सटीक हों, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। एक समय था जब पढ़ाई के लिए युवाओं को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि कैसे नीतीश कुमार की नीतियों ने राज्य को तकनीकी शिक्षा का नया केंद्र बना दिया है, जहाँ बच्चे घर बैठे ही उच्च स्तरीय ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
Bihar Technical Education: कैसे बदला बिहार का शिक्षा परिदृश्य
उपमुख्यमंत्री सह विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य में छात्रों के पलायन में भारी कमी आई है क्योंकि अब उन्हें बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। चौधरी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों और कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। इन नीतियों के तहत ही बिहार आज Bihar Technical Education का एक मजबूत केंद्र बन गया है।
उन्होंने बताया कि सात निश्चय योजना के परिणामस्वरूप आज राज्य के सभी 38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज और 46 पॉलिटेक्निक संस्थान स्थापित हो चुके हैं। पहले जहां बिहार का पैसा और संसाधन बाहर चला जाता था, अब हजारों छात्र-छात्राएं हर साल यहीं इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं और रोजगार के लिए तैयार हो रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह विकास विज्ञान और तकनीक के महत्व को दर्शाता है, जिसके बिना आधुनिक जीवन अधूरा है।
सस्ती और सुलभ शिक्षा: अभिभावकों को मिली राहत
विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में कुल 14,553 सीटें और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 17,243 सीटें स्वीकृत हैं। इन संस्थानों की सबसे बड़ी खासियत इनकी मामूली फीस है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के बीटेक कर सकते हैं। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में बीटेक की पढ़ाई कर रहे छात्रों को नामांकन शुल्क मात्र 10 रुपए देना होता है, जबकि पॉलिटेक्निक के छात्रों के लिए यह शुल्क सिर्फ 5 रुपए है। इस पहल से अभिभावकों को काफी सुकून मिला है और छात्रों का पलायन रुक गया है।
उपमुख्यमंत्री चौधरी ने बताया कि कॉलेजों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाकर पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाई गई है, जिससे संबंधित कोर्सों की मांग में वृद्धि हुई है। समावेशी शिक्षा का लाभ हर बच्चे को मिल रहा है। बिहार सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चियों को 33 फीसदी आरक्षण देने से क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, और बिहार महिला सशक्तिकरण की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विभाग भविष्य के निर्माण की आधारशिला है, जिससे आने वाले समय में बिहार का युवा तकनीक के क्षेत्र में और आगे बढ़ेगा।
रोजगार के मोर्चे पर भी शानदार प्रदर्शन
सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी अपनी पीठ थपथपाई। राज्य स्तर पर नियोजन समिति और संस्थान स्तर पर नियोजन सेल लगातार सक्रिय हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि वर्ष 2025-26 में अब तक करीब 15,246 बच्चों को विभिन्न निजी कंपनियों में रोजगार मिल चुका है। प्रेस वार्ता में विभाग के निदेशक अहमद महमूद, राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद, बिहार के सचिव चंद्रशेखर सिंह तथा बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेश कान्त वर्मा सहित विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







