Bihar Traffic News: बिहार में लगातार सड़कों का जाल बिछ रहा है और उनका विस्तार किया जा रहा है। इस प्रगति के साथ ही सड़कों पर वाहनों की रफ्तार में भी तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। इन बढ़ती दुर्घटनाओं पर लगाम कसने और जनजीवन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
परिवहन विभाग की नई योजना के तहत बिहार के 27 जिलों में आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य भर में 40 नए ट्रैफिक पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य लक्ष्य सड़क हादसों में कमी लाना और यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना है। विभाग का मानना है कि सिग्नल लगे होने से वाहनों की गति स्वतः नियंत्रित होती है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो जाता है।
हादसों पर लगाम लगाने की नई रणनीति
विभाग उन सभी स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल स्थापित करेगा जहां सड़क दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। इसके साथ ही, 40 ट्रैफिक पोस्ट बनाने के पीछे का मकसद हिट एंड रन के मामलों में दोषी वाहन चालकों को तेजी से पकड़ना और उन्हें न्याय के कटघरे में लाना है। अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) और राज्य राजमार्गों (SH) पर भी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ट्रैफिक सिग्नल और पोस्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए, विशेष रूप से शहरों के आसपास के इलाकों में, 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये कैमरे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी निगरानी रखेंगे और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाएंगे। परिवहन विभाग ने बताया कि 27 जिलों में ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम स्थापित करने के लिए 152.45 करोड़ रुपये का एक विस्तृत प्राक्कलन तैयार किया गया है। इसके अलावा, ट्रैफिक इंजीनियरिंग सेंटर की स्थापना के लिए तीन करोड़ रुपये और 40 नए ट्रैफिक पोस्ट के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये की राशि की आवश्यकता होगी।
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सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े और पटना की स्थिति
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 1 जनवरी 2022 से 12 मई 2026 तक की अवधि में कुल 50,663 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों में हिट एंड रन के मामले सबसे अधिक राजधानी पटना में रिपोर्ट हुए हैं। Patna Road Accident के आंकड़ों में पटना में 5093 मामले दर्ज किए गए हैं, जो राज्य में सबसे अधिक है।
पटना के बाद गया जिले में 2437, मुजफ्फरपुर में 2691, रोहतास में 1781, नालंदा में 188, भभुआ में 1079, बेगूसराय में 1598, भोजपुर में 1745, सिवान में 1274, सीतामढ़ी में 1108, औरंगाबाद में 1714, बेतिया में 2263, नवादा में 1231, पूर्णिया में 1350, गोपालगंज में 1198, वैशाली में 1769, समस्तीपुर में 1788, दरभंगा में 1377, अररिया में 988 और जमुई में 896 मामले रिपोर्ट किए गए हैं। ये आंकड़े सड़क सुरक्षा के प्रति तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
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सरकार द्वारा की जा रही ये नई पहलें न सिर्फ सड़क हादसों में कमी लाएंगी, बल्कि बिहार की सड़कों को आम जनता के लिए अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में भी मदद करेंगी। इन कदमों से यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश में सड़क सुरक्षा का एक नया मानक स्थापित होगा।
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