Bihar Expressway: बिहार के पश्चिमी और पूर्वी छोर को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पहले यह परियोजना केंद्र सरकार के पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों को विकसित कर हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूप में तैयार की जानी थी। लेकिन अब बिहार सरकार ने इस परियोजना को अपने दम पर पूरा करने का निर्णय लिया है।
इस महत्वपूर्ण बदलाव के साथ, बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाली एजेंसी बीएसआरडीसीएल (BSRDCL) ने एक्सप्रेसवे के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। संभावना है कि इस बदलाव के साथ एक्सप्रेसवे के रूट में भी कुछ संशोधन हो सकते हैं।






डीपीआर के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन शुरू
बीएसआरडीसीएल ने इस परियोजना की विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली है। अब डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चयनित कंसल्टेंट एजेंसी को हर हाल में छह महीने के भीतर डीपीआर बनाकर बीएसआरडीसीएल को सौंपना अनिवार्य होगा। इस एजेंसी के लिए पूरे असाइनमेंट की अवधि एक साल निर्धारित की गई है।

डीपीआर तैयार कराने के साथ ही, बीएसआरडीसीएल एक लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor – TA) का भी चयन करेगी। यह सलाहकार परियोजना के वित्तीय, तकनीकी और संविदा संबंधी कार्यों में मदद करेगा, जिससे परियोजना को तय समय पर आगे बढ़ाने में आसानी होगी।
350 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, यात्रा होगी आधी
प्रस्तावित यह एक्सप्रेसवे लगभग 350 किलोमीटर लंबा होगा, जो बक्सर से शुरू होकर आरा, पटना, मोकामा और मुंगेर होते हुए भागलपुर तक पहुंचेगा। इस परियोजना के तहत NH-922, NH-31 और NH-33 के कुछ हिस्सों को चौड़ा कर चार से छह लेन का बनाया जाएगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड होने के कारण इस मार्ग पर गाड़ियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और तेज गति से हो सकेगी।
इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बक्सर से भागलपुर तक की यात्रा का समय मौजूदा लगभग 9 घंटे से घटकर करीब चार घंटे रह जाने की उम्मीद है। इससे पश्चिम और पूर्वी बिहार के बीच आवागमन बेहद आसान हो जाएगा और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलेगी।
बिहार को मिलेंगे कई बड़े फायदे
- तेज और सुरक्षित यात्रा: एक्सप्रेसवे बनने से यात्रा का समय कम होगा और बेहतर सड़क के कारण वाहनों की ईंधन खपत भी घटेगी, जिससे आम लोगों और परिवहन कंपनियों दोनों को लाभ मिलेगा।
- आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा: यह कॉरिडोर उद्योगों, कृषि उत्पादों और अन्य सामानों की ढुलाई को कम समय में संभव बनाएगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
- शहरों का बढ़ेगा महत्व: मुंगेर, भागलपुर, मोकामा, पटना और आरा जैसे शहरों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और इन शहरों का आर्थिक महत्व भी बढ़ेगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: बेहतर सड़क संपर्क मिलने से विक्रमशिला, सुल्तानगंज, मुंगेर और पटना सहित विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
निविदा प्रक्रिया और अनुमानित समय-सीमा
बीएसआरडीसीएल द्वारा जारी निविदा के तहत, निविदा कागजात डाउनलोड करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त निर्धारित की गई है। प्री-प्रपोजल मीटिंग 27 जुलाई को होगी और निविदा भरने की अंतिम तारीख भी 27 जुलाई ही है। निविदा का तकनीकी बिड 5 अगस्त को खोला जाएगा। मूल्यांकन के बाद सफल एजेंसियों की वित्तीय बिड खोली जाएगी और सबसे कम दर वाली एजेंसी को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यानी, अगस्त महीने से इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए डीपीआर का काम शुरू हो जाएगा।









