
Electrocution: दरभंगा में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां केवटी प्रखंड में बिजली का काम करते समय एक निजी मिस्त्री की जान चली गई। बिना लाइन काटे काम करने की लापरवाही ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, जिससे गांव में भी शोक का माहौल है।
करेंट लगने से बिजली मिस्री की मौत
घटना के संबंध में बताया गया है कि वह खिखरीपट्टी गांव में ग्यारह हजार वोल्ट वाली पोल पर काम कर रहा था। इसी दौरान उसे जोड़ो से करेंट का झटका लगा और वह नीचे गिर कर घायल हो गया। लोगों ने उसे इलाज के लिए स्थानीय सीएचसी में भर्ती कराया । प्रथमिक उपचार के बाद उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया गया। जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराकर शव को परिजनों को शौप दिया है। पिता बैधनाथ भगत ने बताया कि वह प्राइवेट मिस्त्री के रूप में काम करता है। उसे किसी ने ठेकेदारी काम से काम कराने ले गया था। इस संबंध में जेई कमलेश कुमार ने सरकारी काम से इन्कार किया है। वैसे ये जांच का बिषय है।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा खिखरीपट्टी गांव में हुआ, जब निशु कुमार नामक मिस्त्री बिजली के पोल पर काम कर रहे थे। अचानक करंट लगने से उनका संतुलन बिगड़ा और वह पोल से नीचे गिर गए। गंभीर रूप से घायल निशु को तुरंत डीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
काम के दौरान Electrocution और लापरवाही
बताया जा रहा है कि पैगंबरपुर निवासी निशु कुमार अपने एक सहयोगी के साथ काम कर रहे थे और इस दौरान बिजली की लाइन बंद नहीं की गई थी। इस गंभीर लापरवाही के कारण निशु कुमार को करंट लगा और वह नीचे गिर पड़े। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग मदद के लिए आगे आए।
परिजन और गांव में शोक का माहौल
मृतक निशु कुमार बैजनाथ भगत और रेणु देवी के अविवाहित पुत्र थे। परिवार के सबसे चहेते सदस्य की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मां रेणु देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक की लहर है। इस दुखद घटना ने साबित किया है कि Electrocution से बचाव के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कितना अनिवार्य है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से निशु को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) केवटी रनवे ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में उन्हें डीएमसीएच रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश, वहां उनकी मौत हो गई।
नीशू का शव पहुंचते हीं मचा कोहराम
केवटी। पैगंबरपुर के बिजली मिस्री नीशू कुमार भगत का शव गांव में पहुंचते हीं कोहराम मच गया। घटना की खबर गांव तथा आसपास इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। घटना की खबर सुनते हीं परिजनों पर मानो पहाड़ टूटकर गिर पड़ा हो। माता रेखा देवी तथा पिता बैधनाथ सहित परिजनों का रो-रोककर बूरा हाल बना है। माता रेखा देवी यह कहकर चित्कार भर रही थी कि “कहां गेला रे हमर दुलरूआ बेटा”। घटना को लेकर पहुंचे महिला पुरूष भी भावुक होकर उसे ढाढस बंधाने में लगी थी। नीशू कुमार की मंगलवार को खिखरीपट्टी गांव में बिजली का काम करने के दौरान उसकी मौत हो गई थी। बैधनाथ के चार पुत्रों में नीशू तीसरे नम्बर पर था। गांव में वह सहज स्वभाव और मृदुल भाषा के लिए चर्चा में था।
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