
Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में मखाना किसानों के लिए अच्छी खबर है। राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की एक टीम ने बेनीपुर प्रखंड के पोहाद्दी गांव का दौरा कर उन्हें उन्नत खेती के महत्वपूर्ण गुर सिखाए हैं। इस पहल से किसानों को अपनी पैदावार बढ़ाने और आय में वृद्धि करने में मदद मिलेगी।
मिट्टी जांच और जैविक खेती पर जोर
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बी. आर. जाना ने पोहाद्दी गांव में किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और जलवायु के अनुकूल खेती करने के नवीनतम तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न तालाबों का निरीक्षण किया और दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित किसान संगोष्ठी को संबोधित किया।




डॉ. जाना ने किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना मिट्टी की जांच किए यह पता नहीं लगाया जा सकता कि किस तत्व की कमी है और मखाना के लिए कौन से पोषक तत्व आवश्यक हैं।
डॉ. बी. आर. जाना ने किसानों से कहा, “आप अपने खेतों में लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता को कायम रखते हुए अधिक से अधिक पैदावार लेने के लिए ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दें। रासायनिक खाद का कम से कम उपयोग करें।”
उन्होंने मखाना अनुसंधान केंद्र के माध्यम से उन्नत बीज प्राप्त करने और अनुदान संबंधी विस्तृत जानकारी भी किसानों को प्रदान की। डॉ. जाना ने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि भले ही बाजार में आज प्रोसेसिंग की नई तकनीकें आ गई हों, लेकिन किसानों द्वारा घर पर अपनाई जाने वाली पारंपरिक तकनीकें सर्वोत्तम हैं, क्योंकि वे मखाना के सभी आवश्यक तत्वों को बरकरार रखती हैं।
कीट-व्याधि से बचाव और सीधा संपर्क
मखाना अनुसंधान केंद्र के तकनीकी सहायक आलोक कुमार ने मखाना के पौधों में लगने वाली कीट-व्याधियों की रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों को किसी भी कठिनाई की स्थिति में वैज्ञानिकों से सीधे संपर्क करने के लिए टेलीफोन नंबर सार्वजनिक किए।
आलोक कुमार ने बताया कि किसान दूरभाष से संपर्क कर या व्हाट्सएप के माध्यम से पौधे का फोटो खींचकर समुचित सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें कीट-व्याधि और खरपतवारों की रोकथाम में मदद मिलेगी, जिससे उपज बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इस अवसर पर मखाना कृषक उमेश साहनी, प्रमोद साहनी, घूरन साहनी, फूलों साहनी, योगी साहनी, बिकाऊ सहनी सहित एक दर्जन से अधिक मखाना उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याओं को वैज्ञानिकों के सामने रखा, जिनका त्वरित समाधान उन्हें मौके पर ही बताया गया। सभी किसानों ने इस संगोष्ठी से नवीनतम जानकारी प्राप्त कर लाभ उठाया।







