
Darbhanga Sanskrit University: दरभंगा। दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में अब छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने स्पष्ट कहा है कि छात्र हित ही सर्वोपरि है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले दरबार हॉल में मुख्यालय के सभी कर्मियों के साथ एक विशेष बैठक में उन्होंने यह बात दोहराई। उन्होंने प्राच्य विषयों की पढ़ाई को और मजबूत करने पर जोर दिया।
शनिवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि नया सत्र शुरू होने जा रहा है, इसलिए छात्र और शिक्षक समय पर आएं और जाएं। उन्होंने बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था की सफलता के लिए ‘दिल में फिंगर प्रिंट इस्तेमाल की भावना’ मजबूत करने का आह्वान किया। कुलपति ने बताया कि राजभवन के दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिससे सत्र नियमितीकरण की स्थिति बेहतर हुई है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।




सत्र नियमितीकरण और प्रशासनिक सुधार पर जोर
विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत ने बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नामांकन, परीक्षा और रिजल्ट को समय पर पूरा करने में कर्मियों की सशक्त भूमिका सुनिश्चित करना था। इसके साथ ही, प्रशासनिक व्यवस्था को भी दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया गया।
कुलसचिव डॉ दिनेश झा ने सभी कर्मियों से सहयोग जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अनुकम्पा के आधार पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं और अन्य समस्याओं को दूर करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
कुलसचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग से नियुक्त होकर आए शिक्षकों को वेतन का भुगतान कर दिया गया है। लंबित वेतन भुगतान के संबंध में उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी व्यवस्था में बदलाव के कारण ऐसा हुआ है, जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
आधुनिक शोध और विश्वविद्यालय का नया मुकाम
धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार झा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि मिलकर छात्रों की सभी जिज्ञासाओं को शांत करें और विश्वविद्यालय को नए मुकाम तक ले जाएं। इसी क्रम में, डॉ नवीन कुमार झा ने आधुनिक विषयों में भी शोध कराने की व्यवस्था देने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। इस बैठक से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है।







