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Bihar News: अब जीविका दीदियों को नहीं लगाने होंगे थानों के चक्कर, जानिए बिहार में क्या है नई पहल Didi Adhikar Kendra

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Didi Adhikar Kendra: बिहार की जीविका दीदियां, जो कभी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकती थीं, अब उन्हें राहत मिलेगी। राज्य सरकार ने उनके अधिकारों की रक्षा और न्याय तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी पहल की है।

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जीविका दीदियों को अब अपनी समस्याओं के समाधान और कानूनी सहायता के लिए थानों, अदालतों या अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सुविधा के लिए Didi Adhikar Kendra स्थापित किए जा रहे हैं, जहां वे आसानी से कानूनी सलाह, समस्या समाधान और न्याय की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।

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क्या है Didi Adhikar Kendra का उद्देश्य?

इन केंद्रों पर जीविका दीदियां न केवल घरेलू हिंसा, लैंगिक अत्याचार जैसी गंभीर घटनाओं में कानूनी मदद ले रही हैं, बल्कि अपने दैनिक कामकाज, समूह संचालन और अन्य व्यावहारिक समस्याओं का भी त्वरित समाधान पा रही हैं। यह पहल विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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कितनी संख्या में खुले हैं ये केंद्र?

जीविका अधिकारियों के अनुसार, पूरे बिहार में फिलहाल 256 Didi Adhikar Kendra संचालित हो रहे हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर 421 करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए राज्य सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी है। प्रत्येक केंद्र पर समूह की अनुशंसा के आधार पर सात सदस्यों की तैनाती की जा रही है।

इन केंद्रों का नियंत्रण चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU), पटना के अधीन है। विश्वविद्यालय के नियंत्रण कक्ष से दीदियों की जरूरत के अनुसार कानूनी सलाहकार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा, ‘दीदी की आवाज केंद्र’ जैसी सुविधाओं के माध्यम से फील्ड से आने वाली शिकायतों को ट्रैक कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

जीविका दीदियों को क्या मिला लाभ?

यह पहल जीविका दीदियों को न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर भी बना रही है। एक जीविका दीदी का कहना है, “अब हमें अपनी समस्या लेकर दूर-दूर नहीं जाना पड़ता। केंद्र पर ही कानूनी सलाह और समाधान मिल जाता है, जो हमारे आत्मसम्मान और सुरक्षा दोनों को मजबूत करता है।” ये केंद्र बिहार सरकार की महिला सशक्तिकरण और न्याय तक पहुंच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहे हैं।

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