
आईजीआईएमएस पटना विरोध प्रदर्शन: पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में शुक्रवार को बड़ा बवाल देखने को मिला। जूनियर डॉक्टरों की गिरफ्तारी के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिससे अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गईं और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शुक्रवार सुबह से ही प्रदर्शनकारी छात्र संस्थान के निदेशक कार्यालय के बाहर जमा हो गए और गिरफ्तार किए गए दो जूनियर डॉक्टरों की तत्काल रिहाई की मांग करने लगे। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि दोपहर 3 बजे तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं और इंजीनियरों से मारपीट के मामले में दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई तो विरोध और तेज किया जाएगा। छात्रों का यह आईजीआईएमएस पटना विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
ओपीडी ठप, मरीज बेहाल
प्रदर्शन के चलते अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से रोक दी गईं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि हिरासत में लिए गए डॉक्टरों को रिहा नहीं किया गया, तो आपातकालीन सेवाओं को भी बाधित किया जा सकता है। इस व्यवधान के कारण इलाज के लिए अस्पताल आए मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इससे पहले दिन में, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत कुमार के नेतृत्व में एक बैठक हुई थी, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन की रणनीति तय की गई।
आईजीआईएमएस पटना विरोध प्रदर्शन: क्या है पूरा मामला?
यह विवाद गुरुवार को जूनियर डॉक्टरों और इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों के बीच केंद्रीय एयर कंडीशनिंग प्रणाली की मरम्मत को लेकर हुए झगड़े के बाद शुरू हुआ। पुलिस के अनुसार, इस घटना में इंजीनियर रिशु मिश्रा, उनके पिता अशोक मिश्रा और लिफ्ट इंजीनियर अमन कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। रिशु मिश्रा की शिकायत के आधार पर शास्त्रीनगर पुलिस स्टेशन में डॉ. दीपक कुमार, डॉ. अजीत कुमार और कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बाद में इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया, जिसके बाद जूनियर डॉक्टरों की हिरासत का यह मुद्दा गर्मा गया।
अपनी शिकायत में, रिशु मिश्रा ने बताया कि विवाद बुधवार शाम को ही शुरू हो गया था, जब वे रेडियोलॉजी विभाग में एसी मरम्मत का काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जूनियर डॉक्टरों ने उनसे बहस की और बात धक्का-मुक्की तथा मारपीट तक पहुंच गई। मिश्रा ने कहा कि उन्होंने उसी दिन संस्थान के निदेशक को इस मामले की जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत के अनुसार, जब वे बाद में निदेशक से फिर से इस मुद्दे पर बात करने के लिए लौटे, तो उन्हें, उनके पिता और लिफ्ट इंजीनियर को मेडिकल छात्रों के एक समूह ने घेर लिया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। छात्रों की मुख्य मांग जूनियर डॉक्टरों की हिरासत समाप्त करना और एफआईआर वापस लेना है।
पुलिस जांच जारी, अस्पताल प्रशासन मौन
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच जारी है और पूछताछ के दौरान जुटाए गए सबूतों तथा बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। खबर लिखे जाने तक, अस्पताल प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






