
JDU में कलह: भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय विधान परिषद उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी की हार ने जदयू के भीतर भूचाल ला दिया है। इस हार के बाद पार्टी के अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गए हैं, और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बागी उम्मीदवार मनोज कुमार उपाध्याय की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
JDU infighting: भोजपुर-बक्सर हार पर भड़की जदयू, बागी मनोज उपाध्याय का बड़ा आरोप
हार के पीछे की वजह: JDU infighting
चुनाव से पहले जदयू से टिकट नहीं मिलने पर मनोज कुमार उपाध्याय ने बगावती तेवर अपना लिए थे। उन्होंने पार्टी के फैसले से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया। अब जीत के बाद उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। मनोज उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने दशकों तक जदयू के लिए जी-जान से काम किया, लेकिन जब स्थानीय निकाय विधान परिषद चुनाव में एक समर्पित कार्यकर्ता को मौका देने की बात आई, तो उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
मनोज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय धनबल को प्राथमिकता दी। उनका दावा है कि जदयू अब सामान्य कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनती और ‘धन्ना सेठों’ के सामने नतमस्तक हो गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तो वे पार्टी के लिए क्यों काम करेंगे? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। टिकट वितरण में धनबल को महत्व देना पूरी तरह गलत था, जिसका उन्होंने विरोध किया।
मनोज उपाध्याय के तीखे आरोप: धनबल बनाम जमीनी कार्यकर्ता
अपनी बात रखने की बजाय, पार्टी ने उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। मनोज उपाध्याय ने कहा कि निष्कासन के बाद उनके सामने दो ही रास्ते थे— या तो राजनीति से संन्यास ले लेते या अपनी राजनीतिक ताकत दिखाते। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना और चुनाव लड़कर अपनी पकड़ साबित की। वर्षों से पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े रहने के कारण उनके स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मजबूत संबंध रहे हैं, जिसका असर चुनाव परिणामों में साफ दिखा।
जब उनसे भविष्य में जदयू में वापसी और आगे की राजनीतिक रणनीति के बारे में पूछा गया, तो मनोज उपाध्याय ने साफ किया कि पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किया है, लेकिन वे राजनीति से अलग नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उनके इस बयान को भोजपुर-बक्सर की बिहार राजनीति में एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
जदयू का भविष्य और बिहार राजनीति पर असर
भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में एनडीए की हार के बाद जदयू के भीतर इस तरह का असंतोष सामने आना पार्टी नेतृत्व के लिए गहरी चिंता का विषय है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कार्यकर्ताओं की नाराजगी इसी तरह बनी रही और यह JDU infighting नहीं सुलझी, तो आने वाले चुनावों में जदयू को और भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटता है और बिहार राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
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मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा बोले – JDU में कलह की वजह ‘बागी’ हैं
भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय विधान परिषद उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी की हार के बाद जदयू में अंदरूनी विवाद गहरा गया है। जगदीशपुर विधायक और बिहार सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने इस हार के पीछे बागी मनोज कुमार उपाध्याय को जिम्मेदार ठहराया है। उनके बयान के बाद से पार्टी के भीतर गहमागहमी और बढ़ गई है।
मनोज उपाध्याय का पलटवार: ‘पार्टी धनबल के आगे नतमस्तक’
जदयू से टिकट नहीं मिलने के बाद मनोज कुमार उपाध्याय ने बागी तेवर अपनाते हुए उपचुनाव लड़ा था। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। मनोज उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक जदयू के लिए काम किया, लेकिन जब टिकट की बात आई तो एक समर्पित कार्यकर्ता की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय धनबल को प्राथमिकता दी।
मनोज उपाध्याय ने कहा कि पार्टी अब सामान्य कार्यकर्ताओं की नहीं सुन रही है और धन्ना सेठों के सामने नतमस्तक हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मेहनती कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तो वे पार्टी के लिए क्यों काम करेंगे? टिकट वितरण में धनबल को महत्व देना गलत था और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
राजनीतिक संघर्ष जारी रखने का संकल्प
निष्कासन के बाद मनोज उपाध्याय ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि वर्षों से पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े रहने के कारण उनके स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मजबूत संबंध रहे हैं, जिसका असर चुनाव में देखने को मिला। भविष्य की राजनीति पर संकेत देते हुए उन्होंने साफ किया कि भले ही पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया हो, वे राजनीति से अलग नहीं हो सकते। मनोज उपाध्याय ने कहा कि उनका राजनीतिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में एनडीए की हार के बाद जदयू के भीतर यह असंतोष पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कार्यकर्ताओं की नाराजगी इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले चुनावों में इसका असर और गहरा हो सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







