Life Imprisonment: दरभंगा से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां होली के दिन एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या करने वाले कलयुगी चाचा को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला एवं द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने इस जघन्य अपराध पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए हत्यारे को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, जो पारिवारिक रिश्तों को कलंकित करते हैं।
होली के दिन हुई थी दिल दहला देने वाली घटना
यह मामला 18 मार्च 2022 का है, जब होली का पावन पर्व था। पतोर ओपी क्षेत्र के कोकट गांव निवासी भोला पासवान अपने भाई संगम लाल पासवान के घर पर लकड़ी का चैला लेकर पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। जब उसकी मां कमली देवी ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने चैला से उन पर हमला कर उनका सिर फोड़ दिया। इसी दौरान 6 वर्षीय मासूम अन्नू कुमारी हाथों में अबीर लिए वहीं आ गई। क्रूर भोला पासवान ने बिना सोचे-समझे उस मासूम बच्ची के सिर पर भी उसी लकड़ी के चैला से वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मासूम की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। संगम लाल पासवान ने बहादुरपुर (पतोर ओपी) थाने में कांड संख्या 106/22 के तहत विभिन्न धाराओं (341, 323, 307, 302, 504, 506 भादवि) में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। एपीपी चंपा मुखर्जी ने मामले की पैरवी करते हुए आईओ, डॉक्टर समेत कुल 5 गवाहों की गवाही कराई। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परिशीलन करने के बाद, अदालत ने भोला पासवान को दोषी पाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अदालत ने गत 12 मई को भोला को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी करार दिया था, जिसके बाद सजा के बिंदु पर बहस हुई।
कैसे पहुंचा न्याय? Life Imprisonment के पीछे की कहानी
शुक्रवार को जिला एवं द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद हत्यारे चाचा भोला पासवान को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। भोला पासवान घटना के बाद से ही काराधीन है और अब तक वह 49 महीने जेल में बिता चुका है। यह फैसला दर्शाता है कि कानून ऐसे जघन्य अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/







