Magadh University: बिहार के विश्वविद्यालयों में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति प्रोफेसर शशि प्रताप शाही (एसपी शाही) को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने का निर्देश दिया है। यह फैसला तब आया है जब उनके कार्यकाल का विस्तार चल रहा था, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
Magadh University: कौन होंगे नए कार्यवाहक मगध यूनिवर्सिटी कुलपति और क्या हैं शर्तें?
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार केसरी (जूलॉजी विभाग) को कार्यवाहक कुलपति का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाएगा। यह निर्णय 2013 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में लिया गया है। डॉ. केसरी को तुरंत प्रभाव से मगध विश्वविद्यालय के कुलपति का दायित्व संभालने का निर्देश दिया गया है। उनका यह प्रभार तब तक रहेगा, जब तक नियमित कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती या आगे कोई आदेश जारी नहीं होता। महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्यवाहक कुलपति डॉ. केसरी को किसी भी नीतिगत फैसले लेने से पहले राज्यपाल की पूर्व अनुमति लेनी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पद से हटाने की वजह: गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप
प्रो. शशि प्रताप शाही, पूर्व मगध यूनिवर्सिटी कुलपति, का मूल कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें विस्तार दिया गया था, जो अभी चल रहा था। उनके कार्यकाल पर तब से तलवार लटकी हुई थी जब बीजेपी नेता और औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों में 150-200 करोड़ रुपये की अवैध निकासी, भ्रष्टाचार के आरोप और अवैध नियुक्तियां शामिल थीं। सुशील कुमार सिंह ने शाही को तत्काल हटाने और मामले की विस्तृत जांच की मांग की थी। माना जा रहा है कि इन्हीं शिकायतों के राजभवन तक पहुंचने के बाद यह कार्रवाई हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन के कार्यकाल में पहली बार है जब किसी कुलपति को इस तरह पद से हटाया गया है।







