
Major Nitish Kumar Singh: बेगूसराय का एक सपूत, जिसने देश की सरहद पर गोलियां खाईं और फिर हार न मानते हुए देश की सबसे कठिन परीक्षा में परचम लहरा दिया। शोपियां में घायल होने के बाद जब लोगों को लगा कि अब करियर खत्म, तब उन्होंने नए सपनों को पंख दिए और हासिल की 305वीं रैंक।
मेजर नीतीश कुमार सिंह बिहार के बेगूसराय जिले के बिजुलिया गांव के रहने वाले हैं। एक साधारण परिवेश में पले-बढ़े नीतीश ने बचपन से ही अनुशासन और पढ़ाई का माहौल देखा। इसी ने उन्हें देश सेवा के मार्ग पर अग्रसर किया और नेशनल डिफेंस एकेडमी के माध्यम से वे भारतीय सेना का हिस्सा बने। सेना में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2017 में, दक्षिण कश्मीर के शोपियां में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक ऑपरेशन के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने उनके सैन्य जीवन की दिशा ही बदल दी, लेकिन उनके इरादे नहीं डिगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Major Nitish Kumar Singh: रणभूमि से UPSC तक का सफर
गंभीर चोट के बावजूद, मेजर नीतीश कुमार सिंह ने हार नहीं मानी। लंबे इलाज और पुनर्वास के बाद उन्होंने अपने भविष्य को नई दिशा देने का फैसला किया। उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा, UPSC सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। यह सफर चुनौतियों से भरा था – एक ओर शारीरिक कष्ट से उबरना था, वहीं दूसरी ओर सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी थी। लेकिन उनके सैन्य अनुशासन और दृढ़ संकल्प ने उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
असाधारण सफलता और प्रेरणा
उनकी अथक मेहनत और लगन का परिणाम तब सामने आया जब UPSC 2025 के नतीजों में उन्होंने ऑल इंडिया 305वीं रैंक हासिल की। इस शानदार सफलता के साथ, वे अब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशासनिक सेवा में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। मेजर नीतीश कुमार सिंह का यह सफर सेना के रणक्षेत्र से लेकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की एक मिसाल बन गया है। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो परिस्थितियां कितनी भी विषम क्यों न हों, हर बाधा को पार किया जा सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।





