
MNREGA News: जैसे किसी खेत में बीज बोना बंद हो जाए और अन्नदाता के हाथ खाली रह जाएं, ठीक वैसे ही सुलतानगंज प्रखंड में मनरेगा मजदूरों के साथ हो रहा है। योजना के तहत नए कार्यों पर पूरी तरह रोक लगने से हजारों मजदूर दाने-दाने को मोहताज होने लगे हैं।
भागलपुर जिले के सुलतानगंज प्रखंड की सभी पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत नए कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस फैसले से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हजारों गरीब मजदूर और उनके परिवार गंभीर आजीविका संकट का सामना कर रहे हैं। मनरेगा, ग्रामीण भारत में रोजगार का एक प्रमुख सहारा है, जो साल में कम से कम 100 दिन का गारंटीड मजदूरी रोजगार प्रदान करता है। नए कार्यों पर रोक का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो अपनी दैनिक मजदूरी के लिए पूरी तरह मनरेगा पर निर्भर हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
MNREGA News: नए कामों पर रोक क्यों?
हालांकि, नए कार्यों पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय जानकारों का मानना है कि यह फंड की कमी या प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं को मंजूरी मिलने में देरी का परिणाम हो सकता है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, खासकर ऐसे समय में जब ग्रामीण रोजगार के अन्य अवसर सीमित हैं। मजदूरों का कहना है कि काम बंद होने से उनके सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। कई मजदूर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उनके बच्चों की पढ़ाई और परिवार के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांग और प्रशासन की चुप्पी
ग्राम पंचायतों में इस मुद्दे को लेकर चिंता का माहौल है। सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि भी प्रशासन से इस मामले पर ध्यान देने और जल्द से जल्द नए कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं ताकि ग्रामीण रोजगार की स्थिति में सुधार हो सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस गंभीर स्थिति पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान अब तक जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों और मजदूरों को उम्मीद है कि सरकार इस ओर ध्यान देगी और मनरेगा के तहत नए कार्य फिर से शुरू होंगे। ग्रामीण विकास के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


