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LPG Gas Crisis: देश में चूल्हा जलने को तरसे…! गहराया LPG Gas Crisis, क्या सरकार जनता से सच छिपा रही है…झूठ बोल रही है?

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LPG Gas Crisis: जैसे धरती की प्यास बुझाने को बादल तरसते हैं, वैसे ही आज देश का चूल्हा जलने को तरस रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देश में LPG गैस की किल्लत पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हुई एलपीजी गैस की कमी को लेकर जनता से झूठ बोल रही है। उन्होंने दावा किया कि गैस एजेंसियों को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।

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वेणुगोपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार भारत की जनता से पूरी तरह झूठ बोल रही है। इस गंभीर आरोप के साथ, विपक्षी दल सरकार की नीतियों और तैयारियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश भर में, विशेषकर होटल उद्योग और छोटे व्यवसायों पर इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है।

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LPG Gas Crisis और सरकार की तैयारी पर सवाल

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी एलपीजी गैस संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों की कमी पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे बार-बार हवाई किराए पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर क्षेत्रों में, खासकर खाड़ी देशों में, किराए पर कोई नियंत्रण नहीं है, और यह पूरी तरह से एयरलाइन के विवेक पर छोड़ दिया जाता है। सरकार अक्सर आपूर्ति-मांग के सिद्धांत का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेती है।

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माथेर ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए पूछा, “क्या उन्हें देश में एलपीजी संकट की आशंका नहीं थी? क्या उनके मन में यह बात नहीं आई कि होटल उद्योग प्रभावित होगा?” उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा और सत्ताधारी दल पर चुनावी राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया, जबकि आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार का ध्यान आवश्यक मुद्दों से भटककर अन्य प्राथमिकताओं पर चला गया है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के बीच एलपीजी की कमी उत्पन्न हुई है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, केंद्र सरकार ने सक्रिय कदम उठाए हैं। घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया गया है, जिसके तहत घरों, अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं के लिए अधिक आवंटन आरक्षित किया गया है। दूसरी ओर, कई क्षेत्रों में वाणिज्यिक उपयोग के लिए एलपीजी वितरण पर अंकुश लगाया गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कदम

रिफाइनरियों को विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। घरेलू पाइपलाइन प्राकृतिक गैस, परिवहन के लिए सीएनजी और आवश्यक पाइपलाइन संचालन के लिए प्राथमिकता आपूर्ति (100% तक) आरक्षित की गई है। इसके तहत, उर्वरक संयंत्रों को 70% आवंटन किया गया है, जबकि अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं और चाय उद्योगों को उनके छह महीने के औसत का 80% प्राप्त हो रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन उपायों का उद्देश्य संकट के बीच आवश्यक सेवाओं और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं और सरकार को इस संकट से निपटने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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