
Munger Ayushman Card: देश के गरीब और वंचित परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सुरक्षा देने वाली महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना मुंगेर जिले में अपनी अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस योजना के लगभग 8 साल बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग महज 50 प्रतिशत लक्षित लाभार्थियों तक ही पहुंच पाया है। मुंगेर की एक बड़ी आबादी आज भी इस योजना के तहत मिलने वाले 5 लाख रुपये के सालाना मुफ्त इलाज के सुरक्षा कवच से दूर है।
आंकड़े बता रहे मुंगेर में आयुष्मान कार्ड की धीमी रफ्तार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंगेर जिले में आयुष्मान कार्ड (गोल्डन कार्ड) बनाने का कुल लक्ष्य 9,93,012 लाभार्थियों का निर्धारित किया गया था। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक केवल 4,92,612 लोगों का ही कार्ड बन पाया है। जिले के 50 प्रतिशत यानी कुल 5,00,400 लक्षित लाभार्थी आज भी इस कल्याणकारी योजना के लाभ से पूरी तरह महरूम हैं। योजना के क्रियान्वयन की यह धीमी गति विभाग के दावों और जागरूकता अभियानों की जमीनी हकीकत को स्पष्ट करती है।




| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल निर्धारित लक्ष्य | 9,93,012 |
| प्राप्त उपलब्धि (कार्ड बने) | 4,92,612 |
| कुल उपलब्धि प्रतिशत | 50% |
| अब भी वंचित लाभार्थी | 5,00,400 |
ये आंकड़े दिखाते हैं कि आधी आबादी अभी भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे से बाहर है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
क्यों पिछड़ रहा है मुंगेर में आयुष्मान कार्ड का लक्ष्य?
आयुष्मान कार्ड निर्माण की गति धीमी होने के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण सामने आए हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जागरूकता की कमी एक बड़ी बाधा है। इसके अलावा, आधार कार्ड और राशन कार्ड में नाम या उम्र की विसंगतियां तथा डेटा मिसमैच होना भी प्रमुख समस्याएं हैं। कई बार सर्वर की समस्या और जनसेवा केंद्रों (सीएससी) तक गरीब परिवारों की समय पर पहुंच न होना भी एक बड़ा कारण बनता है। विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष शिविर लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन आधी आबादी का अब तक योजना से न जुड़ पाना कहीं न कहीं तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है।
मुंगेर के इन निजी अस्पतालों में भी मिलता है मुफ्त इलाज
एक तरफ जहां कार्ड बनाने की रफ्तार धीमी है, वहीं दूसरी तरफ जो लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, उन्हें राहत देने के प्रयास जारी हैं। वर्तमान में मुंगेर शहर के पांच प्रमुख निजी अस्पतालों को इस योजना के तहत अनुबंधित किया गया है, जहां पात्र लाभार्थी अपनी बीमारी का मुफ्त इलाज करा सकते हैं। जिला क्रियान्वयन इकाई (सदर अस्पताल, मुंगेर) के माध्यम से इन अस्पतालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि लाभार्थियों को सही सुविधा मिल सके।
| अस्पताल का नाम | पता | विशेषज्ञता |
|---|---|---|
| सेवायन हॉस्पिटल | नीलम सिनेमा रोड, मुंगेर | जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी |
| सुरिम्स हॉस्पिटल | बड़ी बाजार, मुंगेर | जनरल सर्जरी |
| आशीर्वाद हॉस्पिटल | मयूर चौक, मुंगेर | जनरल सर्जरी |
| जस हॉस्पिटल | बेलन बाजार, मुंगेर | जनरल सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, ऑर्थोपेडिक्स, इमरजेंसी केयर |
| मुंगेर इमरजेंसी | सफियाबाद, मुंगेर | जनरल सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, ऑर्थोपेडिक्स, इमरजेंसी केयर पैकेज |
ये अस्पताल उन लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत हैं, जिनके पास आयुष्मान कार्ड है और उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है।
मुंगेर सेवा मंच के अध्यक्ष संजय बबलू का मानना है कि ‘यदि समय रहते कार्ड निर्माण की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो जिले की एक बड़ी आबादी स्वास्थ्य संकट के समय कर्ज के जाल में फंसने को मजबूर होगी। विभाग को चाहिए कि वे जन प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों और जन वितरण प्रणाली के डीलरों के माध्यम से पंचायत स्तर पर विशेष महाअभियान चलाकर शेष बचे 5 लाख लोगों का कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनवाएं, ताकि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का वास्तविक उद्देश्य धरातल पर पूरी तरह सफल हो सके।’
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि ‘इस योजना के लिए चिन्हित लाभुकों को बुला-बुला कर लगातार आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार प्रचार प्रसार किया जा रहा है। वंचित लोगों से अपील है कि वह अपने नजदीकी सीएससी सेंटर या सदर अस्पताल में अपना आयुष्मान कार्ड जरूर बनाएं। ताकि, स्वास्थ्य संकट के समय कर्ज के जाल में फंसने से बच सकें।’
मुंगेर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस महत्वाकांक्षी योजना को सभी लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए अपनी गति बढ़ानी होगी। जन प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों और जन वितरण प्रणाली के डीलरों को शामिल करते हुए पंचायत स्तर पर विशेष अभियान चलाकर शेष वंचित 5 लाख लोगों को जल्द से जल्द इस सुरक्षा कवच के दायरे में लाना आवश्यक है, ताकि स्वास्थ्य संकट के समय कोई भी परिवार कर्ज के बोझ तले न दबे।







