Patna Crime News: पटना जिले के कुख्यात अपराधी भोला सिंह को 12 साल की लंबी फरारी के बाद आखिरकार कानून के शिकंजे में ले लिया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने इस 3 लाख रुपये के इनामी बदमाश को गुजरात से गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच बिहार लाया गया। यह गिरफ्तारी बिहार के आपराधिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने 16 मई को गुजरात के सूरत शहर से भोला सिंह को धर दबोचा। पश्चिम बंगाल में दर्ज अपहरण के एक पुराने मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तारी के बाद, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए उसे पश्चिम बंगाल के रास्ते बिहार के बाढ़ लाया गया। सुरक्षा कारणों से उसे ट्रेन द्वारा हाथीदह स्टेशन तक लाया गया, जहाँ से पुलिस टीम उसे सीधे बाढ़ थाना ले गई। कोर्ट खुलने के बाद उसे पेशी के लिए ले जाने की तैयारी की जा रही थी।
12 साल की फरारी का रहस्य और पहचान का खेल
जांच एजेंसियों ने बताया कि भोला सिंह पिछले 12 वर्षों से फरार चल रहा था। इस पूरी अवधि के दौरान उसने अपनी असली पहचान छुपाकर गुजरात के सूरत में पनाह ले रखी थी। वह लगातार ‘गौतम’ और ‘अमित शर्मा’ जैसे कई नकली नामों का इस्तेमाल कर रहा था। लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदलने की वजह से ही वह इतने लंबे समय तक पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा।
भोला सिंह के खिलाफ बिहार के अलग-अलग थानों में हत्या, रंगदारी, अपहरण और अन्य कई गंभीर अपराधों के कुल 11 मामले दर्ज हैं। कई सालों से राज्य की पुलिस उसे तलाश रही थी। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 3 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था। उसके भाई मुकेश सिंह पर भी इनाम रखा गया था, लेकिन मुकेश ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था और बाद में जमानत पर छूट गया था। लेकिन भोला सिंह लगातार फरार रहकर जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। इस Bihar Police Arrest से राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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पूर्व कमांडो की फरारी का राज और आपराधिक नेटवर्क
यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अपराध की दुनिया में कदम रखने से पहले भोला सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में एक जवान के रूप में सेवाएं दे चुका था। उसे कमांडो स्तर का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त था। सुरक्षा बलों में मिली इस विशेष ट्रेनिंग और अपने मजबूत आपराधिक नेटवर्क के कारण ही वह इतने वर्षों तक गिरफ्तारी से बचने में सफल रहा। यही वजह है कि उसकी तलाश कई सालों तक लगातार जारी रही।
बिहार के अपराध जगत में भोला सिंह का नाम लंबे समय से एक प्रमुख अपराधी के तौर पर जाना जाता रहा है। उसका नाम बाहुबली राजनीति और राज्य में हुए कई चर्चित आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है। पिछले दो दशकों से भी अधिक समय तक सक्रिय रहे भोला सिंह को बिहार के सबसे कुख्यात और वांछित अपराधियों में से एक माना जाता था, जिसकी गिरफ्तारी से राहत की सांस ली जा रही है।
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साल 2021 में पंडारक पूर्वी के मुखिया प्रियरंजन कुमार उर्फ गोरेलाल की हत्या के मामले में भी भोला सिंह का नाम सामने आया था। इसके अलावा, पंडारक थाना के एएसआई राजेश कुमार और लाल बहादुर की हत्याओं में भी उसकी संलिप्तता बताई गई थी। इन गंभीर मामलों के बाद से ही उसकी तलाश को और तेज कर दिया गया था। पुलिस रिकॉर्ड में वह लंबे समय से वांछित अपराधियों की सूची में शीर्ष पर था।
अब बाढ़ कोर्ट में भोला सिंह की पेशी के बाद उससे जुड़े सभी मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि फरारी के इन 12 वर्षों के दौरान उसे किन-किन लोगों का सहयोग मिलता रहा और उसने अलग-अलग राज्यों में अपना आपराधिक नेटवर्क किस तरह से फैलाया और संचालित किया। उसकी गिरफ्तारी से कई राज खुलने की उम्मीद है।
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भोला सिंह जैसे कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की एक बड़ी सफलता है। यह न केवल उसके खिलाफ लंबित मामलों में न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा, बल्कि राज्य में अपराध नियंत्रण के प्रयासों को भी नई गति देगा। इस गिरफ्तारी से अपराध जगत में एक कड़ा संदेश गया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता।







