Patna News: बिहार की राजधानी पटना में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इंदिरा गांधी आयुर्र्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के गरीब मरीजों को मुफ्त मिलने वाली दवाएं मेडिकल स्टोर पर बेची जा रही थीं। औषधि विभाग की टीम ने राजाबाजार स्थित दो मेडिकल स्टोरों पर छापा मारकर इस बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है।
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गरीबों के हक पर डाका डाल रहे थे दुकानदार
औषधि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि IGIMS से मिलने वाली मुफ्त दवाएं बाहर के मेडिकल स्टोरों पर बेची जा रही हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर सोमवार को विभाग की टीम ने IGIMS के पास राजाबाजार में न्यू जनता मेडिकल स्टोर और थोक विक्रेता न्यू चंदन फार्मा नामक दो दुकानों पर छापेमारी की। ये दोनों दुकानें सगे भाइयों की बताई जा रही हैं।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को भारी मात्रा में सरकारी दवाएं मिलीं, जो स्पष्ट रूप से IGIMS के लिए थीं। इन दवाओं को गरीब मरीजों को मुफ्त में दिया जाना था, लेकिन दुकानदार उन्हें ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध कमाई कर रहे थे। इस खुलासे से स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छापेमारी में मिलीं एक्सपायर्ड और संदिग्ध दवाएं
औषधि विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान केवल सरकारी दवाओं की कालाबाजारी ही नहीं पकड़ी, बल्कि कई एक्सपायर्ड और संदिग्ध दवाएं भी जब्त कीं। इन दवाओं को बेचना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अधिकारियों ने सभी जब्त दवाओं की जांच शुरू कर दी है और दुकान मालिकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। ऐसी आशंका है कि यह सिर्फ एक दुकान का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क है जो सरकारी अस्पतालों से दवाओं की हेराफेरी कर रहा है। जांच के बाद इस रैकेट के अन्य सदस्यों का भी खुलासा हो सकता है।
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औषधि विभाग की इस कार्रवाई से सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ गए हैं। उम्मीद है कि इस घटना के बाद विभाग दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करेगा, ताकि भविष्य में गरीब मरीजों को उनके हक की दवाएं मिल सकें और ऐसे अवैध धंधों पर लगाम लग सके।







