
Ramdhani Yadav Encounter: बिहार में रामधनी यादव नहीं मारा गया सिस्टम हार गया। बिहार में कानून व्यवस्था का राज स्थापित करने की तरफ एक और कदम बढ़ा है। भागलपुर के सुल्तानगंज में नगर परिषद के EO कृष्ण भूषण की हत्या करने वाले कुख्यात माफिया रामधनी यादव को पुलिस ने बुधवार सुबह एनकाउंटर में मार गिराया। यह कार्रवाई तब हुई जब पुलिस ने उसे घेरा और उसने फायरिंग शुरू कर दी। मगर धनी, सत्ता, रेत और सोने की खान के बीच राम राम सत्य होने तक का गठजोड़ अभी और हैं जो आराम में हैं। पढ़िए
रामधनी यादव एनकाउंटर: कौन था यह ‘धनी’ जिसने बिहार में अवैध रेत और राजनीति का खेला रचा?
रामधनी यादव एनकाउंटर: बिहार के सुल्तानगंज में नगर परिषद के EO को गोली मारने के बाद आज सुबह रामधनी यादव पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। यह नाम सिर्फ एक अपराधी का नहीं, बल्कि बिहार की उस गहरी सच्चाई का प्रतीक है जहाँ बालू और राजनीति का गंदा खेल सालों से चल रहा है। सवाल है कि क्या इस ‘धनी’ की मौत सिर्फ एक पर्दा है, या अब ऐसे और रामधनी बेनकाब होंगे?
रामधनी यादव एनकाउंटर: बालू माफिया से राजनीति तक का सफर
सुल्तानगंज में नगर परिषद के एक कार्यकारी अधिकारी (EO) को दिनदहाड़े उनके चैंबर में घुसकर गोली मारने की घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले रामधनी यादव को आज सुबह पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। रामधनी कोई मामूली अपराधी नहीं था; वह ‘सट्टा’ और अवैध बालू खनन के कारोबार का एक बड़ा नाम था, जिसके इशारे पर बिहार में रेत के अवैध कारोबार का साम्राज्य चलता था।
कहा जाता है कि रामधनी ने बालू खोदकर अकूत संपत्ति अर्जित की थी। उसकी पत्नी स्वयं एनडीए से चुनाव लड़ चुकी है और नगर परिषद की अध्यक्ष भी रह चुकी है। ऐसे में यह सवाल लाज़िमी है कि आखिर इतनी संपत्ति उसने कैसे बनाई और इतने सालों तक क्यों किसी ने उससे सवाल नहीं किया? क्या पुलिस या सत्ता के गलियारों में बैठे लोग उसकी काली कमाई से अनजान थे? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रामधनी यादव की मौत सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि बिहार में ऐसे कई ‘रामधनी’ के गठजोड़ पर सवाल खड़े करती है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ लोग अवैध धंधों के सहारे सत्ता के करीब पहुँच जाते हैं और कानून को ठेंगा दिखाते रहते हैं। नई सरकार के दौर में यह एनकाउंटर का दौर ऐसे कई छिपे हुए चेहरों को बेनकाब करने की चुनौती भी देता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कौन था रामधनी और क्यों था इतना शक्तिशाली?
रामधनी यादव का नाम सिर्फ अवैध सट्टेबाजी और बालू माफिया के रूप में ही नहीं, बल्कि कई राजनीतिक गलियारों में भी गूँजता था। उसकी हनक इतनी थी कि कहा जाता था कि नेताओं की कुर्सी की नींव उसके बिना खड़ी नहीं रह सकती। उसका रसूख इतना बड़ा था कि वह खुलेआम अपराधों को अंजाम देने से भी नहीं हिचकता था।
आज भले ही रामधनी यादव एनकाउंटर में ढेर हो गया हो, लेकिन यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है। ऐसे कितने और रामधनी प्रदेश में सक्रिय हैं, जिन्हें अब खोजने और उन पर लगाम लगाने की आवश्यकता है? यह नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Ramdhani Yadav Encounter: EO की हत्या का बदला और माफिया का अंत
भागलपुर पुलिस ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण की हत्या के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया है। यह घटना बुधवार तड़के हुई। मंगलवार को रामधनी यादव ने अपने दो हथियारबंद साथियों के साथ मिलकर नगर परिषद के अध्यक्ष राजकुमार गुड्डू पर हमला किया था। इस दौरान निहत्थे ईओ कृष्ण भूषण बीच-बचाव करने आए और अपराधियों की गोली का शिकार बन गए। अध्यक्ष राजकुमार गुड्डू भी गंभीर रूप से घायल हैं और पटना में उनका इलाज चल रहा है। पुलिस को सूचना मिली थी कि रामधनी अपने गैंग के कुछ सदस्यों के साथ छिपा हुआ है। पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की तो उसने पुलिस पर गोलियां चला दीं। जवाबी कार्रवाई में रामधनी यादव मारा गया, जबकि तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कौन था रामधनी यादव और क्यों हुई EO की हत्या?
रामधनी यादव सुल्तानगंज घाट का कुख्यात माफिया था। वह गंगा घाट पर दुकानदारों से देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें अवैध वसूली और बालू की ढुलाई से अकूत संपत्ति अर्जित करता था। उसकी इस अवैध कमाई की वजह से उसने खूब दौलत और राजनीतिक पहुंच बनाई थी। उसकी पत्नी नीलम देवी स्वयं नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और 2020 में एक राजनीतिक दल से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। सोशल मीडिया पर रामधनी की कई नेताओं के साथ तस्वीरें मौजूद हैं। ईओ कृष्ण भूषण, जो मूल रूप से मधुबनी के निवासी थे, सुल्तानगंज में अपनी तैनाती के बाद से गंगा घाट पर चल रहे अवैध धंधों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे थे। उनकी सख्ती से रामधनी यादव के अवैध वसूली के साम्राज्य को भारी नुकसान हो रहा था, और माना जा रहा है कि यही उनकी हत्या का मुख्य कारण बना।
माफिया रामधनी और कनबुच्चा की वर्चस्व की जंग
ईओ कृष्ण भूषण की हत्या के पीछे सिर्फ रामधनी यादव का अवैध धंधा नहीं, बल्कि इलाके में वर्चस्व की पुरानी लड़ाई भी एक बड़ा कारण है। रामधनी का प्रतिद्वंद्वी रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा यादव भी इलाके का बड़ा माफिया है और पुलिस के टॉप-10 अपराधियों में शामिल है। कनबुच्चा यादव की पत्नी दयावती देवी भी नगर परिषद की अध्यक्ष रही हैं, जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए रामधनी की पत्नी नीलम देवी ने हटाया था। कनबुच्चा यादव का झुकाव घायल नगर परिषद अध्यक्ष राजकुमार गुड्डू की तरफ है। 2023 में रामधनी पर गोली चली थी, जिसमें राजकुमार गुड्डू का नाम सामने आया था। सुल्तानगंज घाट से होने वाली अवैध कमाई को लेकर रामधनी यादव और कनबुच्चा के बीच सीधी जंग थी, जिसकी बलि चढ़ गए निर्दोष ईओ कृष्ण भूषण। पुलिस की इस कार्रवाई से अपराधियों में भय का माहौल है और बिहार में अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध दिख रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







