
Bihar Politics: फागुन के रंग देश भर में घुले हैं, पर बिहार की सियासी गलियों में एक अलग ही रंगत छाई हुई है। सत्ता के खेल में बिछी बिसात पर हर मोहरा अपनी चाल चल रहा है, और सोशल मीडिया के मंच से उठे सियासी नगमों की गूँज दूर तलक जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के ट्वीट इन दिनों बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाए हुए हैं। होली के त्योहार पर भी उनके सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर कई पोस्ट देखने को मिले, जिन्होंने सियासत को और गरमा दिया।
एक पोस्ट में उन्होंने बिहार में मटन बनाने की विविधता पर बात करते हुए लिखा, ”बिहार में मटन बनाने की अनेकों व विविध रेसिपीज हैं, क्योंकि मटन हम बिहारियों के लिए महज एक व्यंजन नहीं बल्कि इमोशन है।” इसी पोस्ट का जवाब देते हुए उन्होंने आगे जो कहा, उसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने लिखा, ”रही बात बिहार की सियासत की तो लगता है कि ‘बिहार में हो रहा कुछ खेला, बदल सकती है बिहार की सियासी बेला’। वैसे गैरों की गैर जानें, मैं तो बस इतना जानूं खेल और सियासत में सबका नंबर आता है, मेरा भी आएगा और बड़ी धमक के साथ आएगा।” ये सियासी बयान अब प्रदेश में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
उनके इस पोस्ट के बाद से बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। सियासी पंडित इन ट्वीट्स के गहरे अर्थ निकालने में जुटे हैं और भविष्य की राजनीतिक बिसात पर इसके संभावित असर का विश्लेषण कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन ट्वीट्स ने न सिर्फ राजद समर्थकों, बल्कि अन्य दलों के नेताओं का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
बिहार की सियासत में रोहिणी आचार्य का ‘खेला’
होली के पावन अवसर पर उन्होंने अपने पति के साथ एक वीडियो साझा कर लोगों को पर्व की बधाई भी दी। इसके अलावा, एक भावुक पोस्ट में उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को याद करते हुए लिखा कि मटन करी उनके पापा की पसंदीदा रेसिपी है। इन लगातार सामने आ रहे सियासी बयानों और व्यक्तिगत यादों के मिश्रण से रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।
उनकी हर पोस्ट को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और भी दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पारिवारिक यादें और राजनीतिक संकेत
यह पहली बार नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट्स के जरिए बिहार की सियासत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई हो। समय-समय पर वह अपने तीखे और बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं, जिससे राजनीतिक बहस को एक नई दिशा मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी सक्रियता से यह संकेत मिल रहा है कि लालू परिवार की नई पीढ़ी राजनीति में अपनी जगह बनाने को लेकर काफी गंभीर है।





